किरायेदारी विवादों में अक्सर यह गलतफहमी देखी जाती है कि यदि कोई व्यक्ति किसी संपत्ति का वास्तविक मालिक है, तो वह कभी भी उस परिसर में प्रवेश कर सकता है। केरल हाईकोर्ट ने इस धारणा को स्पष्ट रूप से अस्वीकार करते हुए कहा है कि क्रिमिनल ट्रेसपास और हाउस ट्रेसपास जैसे अपराध मालिकाना हक के खिलाफ नहीं, बल्कि विधिसम्मत कब्जे के खिलाफ होते हैं। इसलिए यदि कोई परिसर किसी किरायेदार के वैध कब्जे में है, तो उसका असली मालिक भी उसमें मनमाने ढंग से प्रवेश नहीं कर सकता, खासकर तब जब प्रवेश का उद्देश्य कोई अवैध कृत्य करना हो।
इस मामले में Damodaran K. v. State of Kerala, Crl. R.P. No. 212 of 2016, निर्णय दिनांक 26 मार्च 2026, में न्यायमूर्ति Jobin Sebastian ने यह महत्वपूर्ण सिद्धांत दोहराया।
क्या था मामला
अभियोजन के अनुसार, 11 मई 2009 को दोपहर लगभग 12 बजे आरोपी, जो कमरे का मालिक था, Karadka Panchayat के Mulleriya स्थित कमरे में घुस गया। यह कमरा शिकायतकर्ता PW1 ने उसी आरोपी से किराये पर लिया हुआ था। आरोप था कि आरोपी ने कमरे में रखे घरेलू सामान को बाहर फेंक दिया और नुकसान पहुँचाया, जिससे लगभग 10,000 रुपये की क्षति हुई। इसी आधार पर उसके खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 454 और 427 के तहत मुकदमा चलाया गया।
मुकदमे के दौरान अभियोजन ने नौ गवाह पेश किए। PW1 शिकायतकर्ता था, PW2 उसकी पत्नी थी, और PW3, PW4, PW5 तथा PW9 स्वतंत्र गवाह थे। रिकॉर्ड से यह भी सामने आया कि घटना के समय PW1 और PW2 कमरे में मौजूद नहीं थे, क्योंकि वे अपने एक रिश्तेदार के घर गए हुए थे। लेकिन स्वतंत्र गवाहों ने अदालत में कहा कि उन्होंने आरोपी को किरायेदार के कब्जे वाले कमरे में प्रवेश करते और सामान बाहर फेंकते देखा था। हाईकोर्ट ने पाया कि इन गवाहों के बयान विश्वसनीय, सुसंगत और महत्वपूर्ण विरोधाभासों से मुक्त थे।
निचली अदालतों का निर्णय
ट्रायल कोर्ट ने आरोपी को धारा 454 IPC और धारा 427 IPC के अपराधों में दोषी ठहराया। ट्रायल कोर्ट ने धारा 454 के लिए एक वर्ष का साधारण कारावास और जुर्माना, तथा धारा 427 के लिए छह महीने का साधारण कारावास और जुर्माना दिया। बाद में अपीलीय अदालत ने दोषसिद्धि को बरकरार रखा, लेकिन सजा कम कर दी।
हाईकोर्ट ने क्या कहा
केरल हाईकोर्ट ने साफ कहा कि यहां मूल प्रश्न ownership का नहीं बल्कि lawful possession का है। अदालत ने माना कि कमरा भले आरोपी का था, लेकिन घटना के समय वह कमरा किरायेदार PW1 के वैध कब्जे में था। इसलिए मालिक का यह तर्क कि वह अपने ही कमरे में गया था, उसे स्वतः आपराधिक दायित्व से मुक्त नहीं करता।
अदालत ने कहा कि जब कोई व्यक्ति दूसरे के वैध कब्जे वाले परिसर में अनधिकृत रूप से इस इरादे से प्रवेश करता है कि वहां कोई अवैध कृत्य करेगा, तब हाउस ट्रेसपास का अपराध बनता है। इस मामले में किरायेदार का कब्जा सिद्ध था, और आरोपी द्वारा सामान बाहर फेंकना तथा नुकसान पहुँचाना यह दिखाने के लिए पर्याप्त था कि प्रवेश केवल मालिकाना अधिकार के प्रयोग के लिए नहीं, बल्कि एक अनुचित और दंडनीय कृत्य के लिए था।
हाईकोर्ट का अंतिम निष्कर्ष
हाईकोर्ट ने आरोपी की दोषसिद्धि बरकरार रखी। अदालत ने माना कि ट्रायल कोर्ट और अपीलीय अदालत द्वारा साक्ष्यों की सराहना में कोई ऐसी कानूनी त्रुटि, विकृति या गंभीर असंगति नहीं थी, जो रिवीजनल जुरिस्डिक्शन में हस्तक्षेप को उचित ठहराए। हालांकि अदालत ने यह भी माना कि विवाद की जड़ एक मालिक और किरायेदार के बीच का विवाद था और आरोपी के विरुद्ध कोई आपराधिक पूर्ववृत्त सिद्ध नहीं हुआ था, इसलिए सजा में नरमी दी जा सकती है।
इसी कारण हाईकोर्ट ने सजा को संशोधित करते हुए धारा 454 और 427 दोनों अपराधों के लिए कारावास को “till the rising of the Court” तक सीमित कर दिया। साथ ही धारा 427 के लिए आरोपी को 15,000 रुपये क्षतिपूर्ति PW1 को section 357(3) CrPC के तहत देने का निर्देश दिया गया। भुगतान न होने पर एक माह के साधारण कारावास का प्रावधान रखा गया।
फैसले का महत्व
यह निर्णय इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि यह एक बुनियादी आपराधिक कानून सिद्धांत को फिर से पुष्ट करता है कि कब्जा और मालिकाना हक एक ही चीज नहीं हैं। किरायेदार के वैध कब्जे में दी गई संपत्ति पर मालिक का अधिकार बना रहता है, लेकिन वह अधिकार कानून के दायरे में ही लागू किया जा सकता है। यदि मालिक को किरायेदार से शिकायत है, तो उसे नागरिक या वैधानिक उपाय अपनाने होंगे, न कि स्वयं परिसर में घुसकर सामान फेंकने, तोड़फोड़ करने या जबरन कब्जा लेने जैसे कदम उठाने होंगे।
निष्कर्ष
केरल हाईकोर्ट का यह फैसला एक स्पष्ट संदेश देता है कि “true owner” होना, “lawful possession” को तोड़ने का लाइसेंस नहीं है। जब तक किरायेदार का कब्जा विधिसम्मत है, तब तक मालिक भी कानून अपने हाथ में नहीं ले सकता। संपत्ति संबंधी अधिकारों के विवाद का समाधान अदालतों और वैधानिक प्रक्रियाओं से होगा, न कि बलपूर्वक प्रवेश और तोड़फोड़ से।