दिल्ली हाईकोर्ट की जस्टिस अनिल क्षत्रपाल और जस्टिस अमित महाजन की डिवीज़न बेंच ने फैसला सुनाया कि 30 जून को रिटायर होने वाला सरकारी कर्मचारी 1 जुलाई को मिलने वाले इंक्रीमेंट का हकदार है, क्योंकि यह इंक्रीमेंट रिटायरमेंट से पहले पूरी की गई सेवा के साल के लिए अर्जित किया जाता है। इसे सिर्फ इसलिए नकारा नहीं जा सकता कि यह रिटायरमेंट के बाद देय होता है।

यह फैसला Union of India & Ors. v. Naresh Kumar Gupta, W.P.(C) 12216/2024, निर्णय दिनांक 20 March 2026, में दिल्ली हाईकोर्ट की Division Bench Justice Anil Kshetarpal और Justice Amit Mahajan ने दिया। मामले में कर्मचारी 30.06.2021 को सेवानिवृत्त हुआ था और increment 01.07.2021 को देय था। हाईकोर्ट ने CAT के आदेश में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया और केंद्र सरकार की याचिका खारिज कर दी।

अदालत ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले Director (Admn. and HR), KPTCL v. C.P. Mundinamani पर भरोसा करते हुए कहा कि annual increment किसी “अगले दिन” की तकनीकी औपचारिकता नहीं, बल्कि पिछले एक वर्ष की संतोषजनक सेवा और good conduct का प्रतिफल है। इसलिए कर्मचारी ने जब आवश्यक सेवा-अवधि पूरी कर ली, तो उसका entitlement crystallise हो जाता है; केवल इस कारण benefit नहीं छीना जा सकता कि वह payable date वाले दिन service में नहीं था।

दिल्ली हाईकोर्ट ने यह भी कहा कि ऐसी संकीर्ण व्याख्या arbitrariness को जन्म देगी। कोर्ट ने माना कि विभाग उस benefit को deny नहीं कर सकता जो कर्मचारी पहले ही earn कर चुका है, भले ही administrative rules के कारण उसका भुगतान अगले दिन होना हो। साथ ही, अदालत ने CAT द्वारा दिए गए consequential reliefs में भी दखल नहीं दिया।

इस निर्णय का सीधा अर्थ यह है कि 30 जून/31 दिसंबर को retire होने वाले कर्मचारियों के notional increment और revised pension fixation के दावों को अब और मजबूती मिली है, खासकर जहां increment केवल अगले दिन payable होना था।