राजस्थान हाईकोर्ट, जोधपुर पीठ ने Shobha Kanwar v. Narpat Singh तथा connected matter Dr. Narpat Singh v. Smt. Shobha Kunwar, D.B. Civil Misc. Appeal No. 3388/2025 एवं D.B. Civil Misc. Appeal No. 3601/2025, में 1 अप्रैल 2026 को सुनाए गए अपने महत्वपूर्ण फैसले में कहा कि तलाकशुदा पत्नी का section 25 Hindu Marriage Act के तहत permanent alimony पाने का अधिकार एक स्वतंत्र और पृथक अधिकार है। Justice Arun Monga और Justice Yogendra Kumar Purohit की खंडपीठ ने स्पष्ट किया कि केवल इस वजह से कि पत्नी के बालिग बेटे कमाने लगे हैं, उसके स्थायी गुजारा भत्ते के अधिकार को न तो खत्म किया जा सकता है और न ही मूल रूप से कमजोर किया जा सकता है।
मामला Family Court, Jodhpur के 29 अगस्त 2025 के उस निर्णय से उठा, जिसमें पति-पत्नी का विवाह-विच्छेद करते हुए पत्नी को ₹25 लाख स्थायी गुजारा भत्ता देने का आदेश दिया गया था। इस आदेश के खिलाफ दोनों पक्ष हाईकोर्ट पहुँचे। पत्नी ने कहा कि यह राशि बहुत कम है और उसे बढ़ाकर कम से कम ₹2 करोड़ किया जाना चाहिए, जबकि पति ने तर्क दिया कि ₹25 लाख भी अधिक है। हाईकोर्ट ने अपने फैसले में दर्ज किया कि विवाह 23 अप्रैल 1994 को हुआ था, बाद में दांपत्य संबंध बिगड़े, पत्नी ने 2 मार्च 2015 को section 13 Hindu Marriage Act के तहत तलाक याचिका दायर की, और इस विवाह से दो बेटे हुए जो अब वयस्क हैं।
पति की ओर से यह प्रमुख दलील दी गई कि पत्नी शिक्षित है, उसकी अपनी कमाने की क्षमता है, और वह अपने कमाऊ बालीग बेटों के साथ रह रही है। पति ने यह भी कहा कि section 25 के तहत स्थायी गुजारा भत्ता केवल पत्नी के लिए हो सकता है, वयस्क बच्चों के पालन-पोषण, शिक्षा या विवाह का बोझ पति पर नहीं डाला जा सकता। इसी आधार पर उसने कहा कि पत्नी के बेटों की earning capacity को देखते हुए स्थायी भत्ते की राशि कम मानी जानी चाहिए।
इसके विपरीत पत्नी ने कहा कि उसके पास कोई स्थिर और पर्याप्त स्वतंत्र आय नहीं है, जबकि पति एक Specialist Medical Officer (ENT) है और सरकारी सेवा में होने के कारण उसकी आय स्थिर, सुरक्षित और पर्याप्त है। रिकॉर्ड पर उपलब्ध सामग्री के आधार पर हाईकोर्ट ने भी माना कि पति की नियमित आय लगभग ₹2 लाख प्रति माह के आसपास है, जो स्थायी सरकारी नौकरी, भत्तों, increments और भविष्य की आर्थिक सुरक्षा के साथ आती है। अदालत ने यह भी नोट किया कि पत्नी की वर्तमान स्वतंत्र आय या self-maintenance की क्षमता के समर्थन में कोई ठोस और ताजा प्रमाण नहीं था।
खंडपीठ ने कहा कि section 25 Hindu Marriage Act का उद्देश्य केवल जीवित रहने भर का सहारा देना नहीं है, बल्कि वैवाहिक टूटन के बाद आर्थिक रूप से कमजोर पड़े spouse को गरिमापूर्ण जीवन, दीर्घकालिक आर्थिक स्थिरता और उचित आवासीय सुरक्षा देना भी है। कोर्ट ने माना कि alimony तय करते समय पति-पत्नी की सामाजिक स्थिति, आय, earning capacity, पत्नी की आवश्यकताएँ, वैवाहिक जीवन के दौरान का standard of living, तथा भविष्य की सुरक्षा जैसे तत्वों को संतुलित रूप से देखना आवश्यक है।
फैसले का सबसे महत्वपूर्ण भाग वह रहा, जहाँ हाईकोर्ट ने साफ शब्दों में कहा कि पत्नी के बेटों की majority और earning capacity, भले ही एक प्रासंगिक परिस्थिति हो, लेकिन उससे पत्नी का section 25 के तहत entitlement खत्म नहीं होता। अदालत ने कहा कि permanent alimony बच्चों की dependency पर आधारित अधिकार नहीं है, बल्कि विवाह-विच्छेद से उत्पन्न spouse का एक distinct and independent right है। कोर्ट के शब्दों में, ऐसे तथ्य अधिकतम quantum पर असर डाल सकते हैं, परंतु वे पत्नी के मूल entitlement को negate नहीं कर सकते।
हाईकोर्ट ने यह भी माना कि पत्नी द्वारा माँगी गई ₹2 करोड़ की राशि उपलब्ध साक्ष्य के आधार पर उचित नहीं ठहराई जा सकती, क्योंकि पति की कथित अतिरिक्त आय ₹8–10 लाख प्रति माह ठोस दस्तावेजी प्रमाण से साबित नहीं हुई थी। लेकिन दूसरी ओर, अदालत ने यह भी कहा कि Family Court द्वारा दिया गया ₹25 लाख का permanent alimony बहुत कम था, विशेषकर तब जब विवाह लंबा रहा, अलगाव भी लंबे समय से चला, पत्नी के पास स्वतंत्र आय और residential security का अभाव है, और पति के पास स्थिर तथा पर्याप्त आय है।
इन्हीं कारणों से राजस्थान हाईकोर्ट ने पत्नी की appeal स्वीकार करते हुए और पति की appeal खारिज करते हुए स्थायी गुजारा भत्ता ₹25 लाख से बढ़ाकर ₹40 लाख कर दिया। अदालत ने निर्देश दिया कि पति यह राशि छह महीने के भीतर पत्नी को अदा करे और तब तक वह पहले की तरह मासिक maintenance देता रहे। इस तरह अदालत ने स्पष्ट संदेश दिया कि तलाकशुदा पत्नी का आर्थिक संरक्षण किसी दया का विषय नहीं, बल्कि कानून द्वारा मान्यता प्राप्त स्वतंत्र वैधानिक अधिकार है, जिसे केवल इस आधार पर कमतर नहीं किया जा सकता कि उसके बालीग बेटे आज कमाने लगे हैं।