मद्रास हाईकोर्ट ने K. Suresh v. The Union of India & Anr., W.P. Nos. 7179 & 7180 of 2025, citation 2026:MHC:1335, निर्णय दिनांक 02.04.2026 में महत्वपूर्ण फैसला देते हुए कहा कि किसी लोक सेवक की service केवल इसलिए समाप्त नहीं मानी जा सकती कि उसने सेवानिवृत्ति के दिन दोपहर में कार्यालय छोड़ दियाJustice C.V. Karthikeyan और Justice K. Kumaresh Babu की खंडपीठ ने स्पष्ट किया कि हर सरकारी कार्यालय अपने आधिकारिक closing hours तक काम करता है, और उस समय तक संबंधित अधिकारी भी service में माना जाएगा। इसलिए कोई अधिकारी बीच में दफ्तर छोड़कर बाद में यह नहीं कह सकता कि वह अब service में नहीं था और उसके खिलाफ charge memo वैध रूप से serve नहीं किया जा सकता।

यह मामला K. Suresh, एक IAS अधिकारी से जुड़ा था, जो 31 अगस्त 2015 को अधिवर्षता आयु प्राप्त कर सेवानिवृत्त होने वाले थे। याची का कहना था कि उन्होंने उस दिन लगभग 2:15 बजे कार्यभार सौंप दिया था और इसके बाद कार्यालय छोड़ दिया था। उनका तर्क था कि एक बार कार्यभार हस्तांतरित हो जाने के बाद वे उसी क्षण से service में नहीं रहे, इसलिए बाद में की गई charge memo की service अवैध मानी जानी चाहिए।

मामले के रिकॉर्ड से अदालत ने नोट किया कि केंद्र सरकार की ओर से 26.08.2015 को ही charge memo याची के personal और official email addresses पर भेज दिया गया था। इसके अलावा, सेवानिवृत्ति वाले दिन उन्हें कार्यालय में व्यक्तिगत रूप से charge memo serve करने का प्रयास किया गया, लेकिन वे उपलब्ध नहीं थे। इसके बाद संबंधित अधिकारियों ने उनके आधिकारिक निवास पर लगभग 3:15 बजे charge memo paste कराया, उसकी photography/videography कराई, panchanama तैयार किया, और पंजीकृत डाक से भी प्रेषित किया। डाक लिफाफा “refused” endorsement के साथ वापस आया।

याची की ओर से यह भी दलील दी गई कि All India Services (Discipline and Appeal) Rules के Rule 8(5) के अनुसार charge memo personally deliver किया जाना चाहिए, इसलिए email, चस्पा करने या registered post जैसे वैकल्पिक माध्यम पर्याप्त नहीं हैं। परंतु हाईकोर्ट ने इस तर्क को स्वीकार नहीं किया। अदालत ने कहा कि यदि कोई अधिकारी जानबूझकर कार्यालय से गायब हो जाए, तो वह बाद में इसी आधार पर यह दावा नहीं कर सकता कि उसे charge memo की valid service नहीं हुई।

कोर्ट की सबसे अहम टिप्पणी यह रही कि “Every public office transacts business till the closing hours in the evening”, और उस समय तक संबंधित अधिकारी public servant माना जाएगा। अदालत ने साफ कहा कि याची अपनी सुविधा के अनुसार किसी भी समय दफ्तर छोड़कर यह दावा नहीं कर सकता कि उसकी service समाप्त हो गई। न्यायालय ने कार्यभार सौंपने वाले दस्तावेज को भी निर्णायक नहीं माना और उसे एक self-serving document बताया।

हाईकोर्ट ने यह भी माना कि याची ने charge memo से बचने की कोशिश की। अदालत के अनुसार, रिकॉर्ड यह दर्शाता है कि संबंधित प्राधिकरणों ने charge memo serve करने के लिए हर संभव कदम उठाया था, जैसे email, personal service का प्रयास, निवास पर चस्पा, और registered post। इस आधार पर कोर्ट ने माना कि charge memo की valid service विधिसम्मत रूप से हो चुकी थी और याची यह नहीं कह सकता कि उसे इसकी कोई जानकारी नहीं थी।

अंततः मद्रास हाईकोर्ट ने Central Administrative Tribunal, Chennai के आदेश में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया और कहा कि charge memo तथा उसके आधार पर शुरू की गई departmental proceedings को रद्द करने का कोई आधार नहीं बनता। अदालत ने आगे निर्देश दिया कि विभागीय कार्यवाही को आगे बढ़ाया जाए और याची को आरोपों का उत्तर देने का अवसर दिया जाए।

फैसले का महत्व

यह निर्णय सेवानिवृत्ति के दिन departmental proceedings की वैधता, charge memo की service, और लोक सेवक की service समाप्ति के वास्तविक समय को लेकर अत्यंत महत्वपूर्ण है। इस फैसले से यह सिद्धांत मजबूत होता है कि service समाप्ति केवल व्यक्तिगत सुविधा या समय से नहीं, बल्कि संस्थागत कार्य-समय और विधिक स्थिति से तय होगी। यदि अधिकारी जानबूझकर service से बचने की रणनीति अपनाता है, तो अदालतें ऐसे तकनीकी तर्कों को स्वीकार नहीं करेंगी।

संक्षेप में

मद्रास हाईकोर्ट ने स्पष्ट कर दिया है कि सेवानिवृत्ति वाले दिन closing hours तक अधिकारी service में माना जाएगाबीच में कार्यालय छोड़ देना, charge memo से बचने का साधन नहीं बन सकता। और यदि प्राधिकरण ने charge memo serve करने के लिए वास्तविक एवं पर्याप्त प्रयास किए हैं, तो departmental proceedings केवल तकनीकी आपत्ति के आधार पर विफल नहीं होगी।