दिल्ली हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में स्पष्ट किया है कि जिस व्यक्ति ने विवादित चेक पर हस्ताक्षर ही नहीं किए हों और जिस बैंक खाते से वह चेक जारी हुआ हो, वह खाता भी उस व्यक्ति का न हो, उसके खिलाफ धारा 138 परक्राम्य लिखत अधिनियम, 1881 के तहत आपराधिक कार्यवाही नहीं चलाई जा सकती। अदालत ने कहा कि धारा 138 के तहत दायित्व मूलतः उसी व्यक्ति पर बनता है जो चेक का “drawer” है, यानी जिसने अपने खाते से चेक जारी किया है।

यह फैसला Sudha Devi v. Anil Kumar, CRL.M.C. 6636/2022, CRL.M.A. 25851/2022 में न्यायमूर्ति Saurabh Banerjee ने दिया। आदेश 18 मार्च 2026 को सुरक्षित रखा गया था और 30 मार्च 2026 को सुनाया गया। आदेश में यह भी दर्ज है कि याचिका दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 482 के तहत दाखिल की गई थी।

मामले के अनुसार, शिकायतकर्ता अनिल कुमार का कहना था कि अगस्त 2020 में याचिकाकर्त्री सुधा देवी और उनके पुत्र ने आर्थिक कठिनाई बताकर अपना मकान बेचने का प्रस्ताव दिया। शिकायतकर्ता ने कथित रूप से अगस्त 2020 से अप्रैल 2021 के बीच कुल ₹10,00,000 अलग-अलग किश्तों में दिए। बाद में संपत्ति बेचने से इनकार कर दिया गया। इसके बाद सुधा देवी के पुत्र ने ₹10,00,000 की वापसी के लिए 1 सितंबर 2021 का एक चेक जारी किया, जो प्रस्तुति पर “funds insufficient” टिप्पणी के साथ dishonour हो गया। इसके बाद विधिक नोटिस भेजा गया और फिर धारा 138 NI Act की शिकायत दायर की गई।

ट्रायल कोर्ट ने 15 दिसंबर 2021 को शिकायत के आधार पर माँ और बेटे, दोनों को समन कर लिया था। इसी समन आदेश को सुधा देवी ने हाईकोर्ट में चुनौती दी। उनका मुख्य तर्क यह था कि वह न तो चेक की हस्ताक्षरकर्ता थीं और न ही चेक उनके बैंक खाते से जारी हुआ था, इसलिए उनके खिलाफ धारा 138 की कार्यवाही कानूनन टिक नहीं सकती।

दिल्ली हाईकोर्ट ने धारा 138 के लिए आवश्यक मूल तत्वों को रेखांकित करते हुए कहा कि चेक उसी व्यक्ति द्वारा ऐसे खाते से जारी होना चाहिए जो उसी के द्वारा संचालित या धारित हो, चेक किसी विधिक देयता या ऋण के निर्वहन के लिए होना चाहिए, और वह अपर्याप्त धनराशि या इसी तरह के कारण से अनादृत होना चाहिए। अदालत ने पाया कि शिकायतकर्ता के अपने ही कथन के अनुसार चेक सुधा देवी के पुत्र ने जारी किया था। इसलिए, यदि चेक के dishonour से कोई आपराधिक दायित्व बनता भी है, तो वह पुत्र पर बन सकता है, सुधा देवी पर नहीं।

अदालत ने विशेष रूप से कहा कि रिकॉर्ड से स्पष्ट है कि न तो चेक याचिकाकर्त्री द्वारा जारी किया गया था और न ही वह उनके किसी एकल या संयुक्त बैंक खाते से निकला था। इसी आधार पर हाईकोर्ट ने माना कि सुधा देवी का उस चेक के निर्गमन या उसके dishonour से प्रत्यक्ष कानूनी संबंध नहीं बनता। इसलिए उनके विरुद्ध धारा 138 की शिकायत अपने आप में पोषणीय नहीं है।

फैसले में सुप्रीम कोर्ट के निर्णय Alka Khandu Avhad v. Amar Syamprasad Mishra, (2021) 4 SCC 675 पर भी भरोसा किया गया। दिल्ली हाईकोर्ट ने उस सिद्धांत को दोहराया कि मात्र संयुक्त देयता होने से किसी व्यक्ति पर धारा 138 का अभियोजन नहीं चल सकता। अभियोजन तभी बनता है जब संबंधित व्यक्ति स्वयं चेक का हस्ताक्षरकर्ता हो और चेक ऐसे खाते से जारी हुआ हो जो उसके द्वारा संचालित हो। संयुक्त देनदारी और चेक के drawer होने में कानून स्पष्ट भेद करता है।

अंततः हाईकोर्ट ने याचिका स्वीकार करते हुए CC NI Act No. 26009/2021, शीर्षक “Anil Kumar vs. Tarun Kumar & Anr.”, तथा 15 दिसंबर 2021 के समन आदेश को, जहाँ तक वे सुधा देवी से संबंधित थे, रद्द कर दिया। यह ध्यान देने योग्य है कि अदालत ने पूरी शिकायत को समग्र रूप से समाप्त नहीं किया, बल्कि केवल याचिकाकर्त्री सुधा देवी के विरुद्ध कार्यवाही को quash किया। पुत्र के विरुद्ध कार्यवाही पर यह राहत स्वतः लागू नहीं हुई।

कानूनी महत्व

यह निर्णय धारा 138 NI Act के दायरे को फिर से स्पष्ट करता है। चेक बाउंस के मामलों में अक्सर शिकायतकर्ता सभी कथित देनदार व्यक्तियों को एक साथ अभियुक्त बना देते हैं। लेकिन यह फैसला बताता है कि व्यक्तिगत मामलों में केवल यह कहना पर्याप्त नहीं है कि किसी व्यक्ति पर पैसा देना बाकी था। जब तक वह व्यक्ति स्वयं चेक का drawer न हो, या कानून की किसी मान्य vicarious liability व्यवस्था के भीतर न आता हो, उसके खिलाफ धारा 138 की आपराधिक कार्यवाही नहीं चलाई जा सकती।

सरल निष्कर्ष

दिल्ली हाईकोर्ट का साफ संदेश है कि धारा 138 NI Act का मुकदमा केवल उसी व्यक्ति पर टिकेगा जिसने चेक जारी किया हो या जो कानूनन उस चेक का drawer माना जा सके। सिर्फ यह आरोप कि किसी व्यक्ति पर भी देयता थी, उसे चेक बाउंस के आपराधिक मुकदमे में घसीटने के लिए पर्याप्त नहीं है। इसलिए, चेक पर हस्ताक्षर न करने वाले व्यक्ति के खिलाफ समन आदेश जारी करना कानून की दृष्टि से टिकाऊ नहीं माना गया।