बॉम्बे हाईकोर्ट की नागपुर पीठ ने एक महत्वपूर्ण निर्णय में कहा है कि यदि पत्नी बिना पर्याप्त और न्यायोचित कारण के पति से अलग रह रही है, तो वह दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 125 के तहत भरण-पोषण की हकदार नहीं होगी। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि भरण-पोषण के आदेश की बुनियाद पति की ओर से “neglect” या “refusal to maintain” होती है। यदि अलग रहना स्वयं पत्नी के निर्णय का परिणाम है और उसके समर्थन में पर्याप्त कारण सिद्ध नहीं होते, तो maintenance का दावा असफल हो सकता है।
यह फैसला Sau. Ratnaprabha Prakash Jawade vs. Prakash Dhyanobaji Jawade, Criminal Revision Application No. 14 of 2024 में दिया गया। मामले की सुनवाई Justice Urmila Joshi Phalke ने की। निर्णय 23 मार्च 2026 को सुनाया गया, जबकि फैसला 10 मार्च 2026 को सुरक्षित रखा गया था। यह आदेश बॉम्बे हाईकोर्ट, नागपुर बेंच का है।
मामले के तथ्य बताते हैं कि पति-पत्नी का विवाह 15 मई 1985 को हुआ था और उनसे एक पुत्र तथा एक पुत्री पैदा हुए, जो अब बालिग हैं। पत्नी का आरोप था कि विवाह के बाद से पति उसके साथ दुर्व्यवहार करता था, शराब पीकर मारपीट करता था, उसके extra-marital affairs थे, और सेवानिवृत्ति के बाद वह दूसरी महिला के साथ रहने लगा। पत्नी ने यह भी कहा कि पति ने उसे जिला परिषद के आवास से निकलने के लिए कहा, जबकि वह स्वयं आयविहीन है और पति को सेवानिवृत्ति लाभ तथा पेंशन मिल रही है।
पत्नी के अनुसार पति को लगभग ₹25,00,000 की retirement benefits मिलीं और वह लगभग ₹20,000 प्रतिमाह पेंशन पा रहा था। इस आधार पर उसने कहा कि पति के पास पर्याप्त साधन हैं और वह उसे भरण-पोषण देने के लिए बाध्य है। उसने पुलिस और पुलिस अधीक्षक, यवतमाल के समक्ष शिकायतें देने का भी उल्लेख किया।
दूसरी ओर पति ने इन आरोपों का खंडन किया। उसका कहना था कि विवाह के लगभग 34 वर्षों तक दोनों साथ रहे, उसने परिवार और बच्चों की परवरिश की, और सेवानिवृत्ति के बाद वह अपने पैतृक गाँव Barad Khopada चला गया। पति का कहना था कि पत्नी गाँव में रहने को तैयार नहीं थी, इसलिए उसने स्वयं उसकी संगति छोड़ दी और सरकारी क्वार्टर में ही रहना जारी रखा।
हाईकोर्ट ने साक्ष्यों का परीक्षण करते हुए पाया कि पत्नी ने अपनी जिरह में स्वीकार किया कि पति की नौकरी के दौरान वह उसके साथ ही रह रही थी और सेवानिवृत्ति तक दोनों साथ रहे। अदालत ने यह भी नोट किया कि पति के रिटायर होने के बाद भी पत्नी बच्चों के साथ जिला परिषद क्वार्टर में रह रही थी। अदालत ने माना कि इस admitted position से prima facie यही निकलता है कि separation की स्थिति पति की नौकरी समाप्त होने और उसके पैतृक स्थान जाने के बाद बनी।
कोर्ट ने यह भी नोट किया कि रिकॉर्ड पर ऐसा कोई ठोस साक्ष्य नहीं था जिससे यह सिद्ध हो कि पति लगातार क्रूरता कर रहा था, शराब की लत से परिवार को प्रताड़ित कर रहा था, या उसके illicit relations थे। अदालत ने कहा कि केवल आरोप पर्याप्त नहीं हैं। यदि पत्नी अलग रहने के लिए इन grounds पर भरोसा कर रही है, तो उन्हें कम से कम कुछ विश्वसनीय सामग्री से समर्थित होना चाहिए।
निर्णय का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा यह रहा कि अदालत ने कहा, पत्नी यदि बिना पर्याप्त कारण पति के साथ रहने से इनकार करती है, तो वह धारा 125 CrPC के अंतर्गत maintenance की हकदार नहीं है। कोर्ट ने यह भी समझाया कि “sufficient reason” क्या है, इसकी कोई exhaustive सूची कानून में नहीं दी गई है। यह हर मामले के facts, social background और surrounding circumstances पर निर्भर करेगा।
अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि पत्नी यह दिखा दे कि पति के घर में उसके साथ प्रताड़ना होती है, या वह पति के साथ सम्मानपूर्वक नहीं रह सकती, तो अलग रहकर भी भरण-पोषण मिल सकता है। दूसरे शब्दों में, यह निर्णय हर अलग रह रही पत्नी के खिलाफ नहीं है। यह केवल उन मामलों पर लागू होता है जहाँ पत्नी के अलग रहने का पर्याप्त कारण साबित नहीं हो पाता।
इस मामले में हाईकोर्ट ने पाया कि पति सेवानिवृत्ति के बाद अपने गाँव चला गया और पत्नी ने उसके साथ जाने से इनकार किया। कोर्ट ने कहा कि उपलब्ध साक्ष्य से यही निष्कर्ष निकलता है कि पत्नी गाँव में नहीं रहना चाहती थी और इसी कारण उसने पति की company join नहीं की। इसलिए अदालत ने माना कि पति की ओर से “refusal” या “neglect” सिद्ध नहीं हुआ।
पत्नी ने यह आपत्ति भी उठाई थी कि फैमिली कोर्ट ने affidavit के आधार पर evidence लिया, जबकि धारा 125 CrPC की कार्यवाही में ऐसा नहीं होना चाहिए था। बॉम्बे हाईकोर्ट ने इस दलील को स्वीकार नहीं किया। अदालत ने कहा कि Family Courts Act, 1984 की धारा 10(3) फैमिली कोर्ट को अपनी प्रक्रिया तय करने की शक्ति देती है, ताकि वह विवाद का सच पता कर सके। साथ ही, धारा 16 affidavit evidence की अनुमति देती है और धारा 20 इस अधिनियम को overriding effect देती है। इसलिए फैमिली कोर्ट द्वारा affidavit evidence लेना अवैध नहीं माना गया।
अंततः हाईकोर्ट ने फैमिली कोर्ट, यवतमाल के 01 मार्च 2023 के आदेश में हस्तक्षेप से इनकार कर दिया और पत्नी की revision application खारिज कर दी। अदालत का निष्कर्ष यह था कि जब रिकॉर्ड पर पति की ओर से refusal and neglect सिद्ध नहीं हुआ और पत्नी के पास अलग रहने का पर्याप्त कारण भी साबित नहीं हुआ, तब maintenance का आदेश पारित नहीं किया जा सकता।
कानूनी महत्व
यह निर्णय धारा 125 CrPC के उस मूल सिद्धांत को दोहराता है कि maintenance कोई automatic entitlement नहीं है। पत्नी को यह दिखाना होता है कि पति ने उसे सचमुच neglected या refused to maintain किया है। साथ ही, यदि पति साथ रखने की bona fide इच्छा दिखाता है और पत्नी अलग रहने के लिए पर्याप्त कारण सिद्ध नहीं कर पाती, तो भरण-पोषण नहीं मिलेगा।
सरल शब्दों में निष्कर्ष
बॉम्बे हाईकोर्ट ने यह नहीं कहा कि अलग रह रही पत्नी को कभी maintenance नहीं मिलेगा। अदालत ने केवल इतना कहा है कि बिना पर्याप्त कारण स्वेच्छा से पति से अलग रहने वाली पत्नी भरण-पोषण की हकदार नहीं होगी। लेकिन जहाँ प्रताड़ना, अपमान, असुरक्षा, या dignified life के साथ रहने में वास्तविक बाधा सिद्ध हो जाए, वहाँ कानून पत्नी की रक्षा करता है।