इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा है कि यदि किसी बच्चे या किशोर की उम्र स्कूल या बोर्ड के दस्तावेज़ों से स्पष्ट रूप से सिद्ध हो रही हो, तो Juvenile Justice Board को उम्र निर्धारण के लिए bone ossification test कराने का आदेश नहीं देना चाहिए। कोर्ट ने माना कि Juvenile Justice (Care and Protection of Children) Act, 2015 की section 94 उम्र निर्धारण की एक स्पष्ट प्राथमिकता तय करती है, और मेडिकल टेस्ट केवल तब कराया जा सकता है जब आवश्यक दस्तावेज उपलब्ध न हों।
केस का नाम, नंबर और बेंच
यह फैसला Pradeep Kori @ Pradeep Harijan (Minor) through Father (Natural Guardian) v. State of U.P. through Addl. Chief Secy. Home, Lucknow and Another में दिया गया। यह Criminal Revision No. 1470 of 2025 था, जिसे Justice Manish Kumar ने 25 March 2026 को तय किया।
मामला क्या था
मामले में revisionist पर Sections 65 and 351(3) of the Bharatiya Nyaya Sanhita तथा Section 3/4(2) of the POCSO Act, 2012 के तहत आरोप थे। आरोप यह था कि उसने 15 वर्ष की एक लड़की के साथ आपत्तिजनक कृत्य किया और उसे किसी को न बताने के लिए धमकाया। उम्र के प्रश्न पर revisionist की ओर से हाई स्कूल marksheet का सहारा लिया गया, जबकि informant की ओर से Class V scholar register का उल्लेख किया गया।
उम्र को लेकर विवाद क्या था
Revisionist के वकील का कहना था कि हाई स्कूल marksheet के आधार पर घटना के समय उसकी उम्र लगभग 15 वर्ष 2 माह 10 दिन थी। दूसरी ओर, informant ने Class V scholar register के आधार पर कहा कि घटना के समय उसकी उम्र लगभग 15 वर्ष 8 माह 29 दिन थी। यानी दोनों दस्तावेज़ों में थोड़ी भिन्नता थी, लेकिन एक महत्वपूर्ण बात समान थी: दोनों ही रिकॉर्ड यह दिखा रहे थे कि आरोपी 16 वर्ष से कम उम्र का था।
निचली अदालतों ने क्या किया
Juvenile Justice Board ने इन दो दस्तावेज़ों में अंतर देखकर revisionist की age determination के लिए ossification test कराने का आदेश दे दिया। इसके खिलाफ अपील की गई, लेकिन Special Judge/POCSO Act ने यह कहते हुए आदेश बरकरार रखा कि दो conflicting documents मौजूद हैं। इसके बाद revisionist हाईकोर्ट पहुँचा।
हाईकोर्ट ने section 94 को कैसे पढ़ा
हाईकोर्ट ने section 94 JJ Act, 2015 को पढ़ते हुए कहा कि उम्र निर्धारण के लिए कानून ने एक क्रम तय किया है। पहले school date of birth certificate या matriculation/equivalent certificate देखा जाएगा। यदि वह उपलब्ध न हो, तो नगर निगम, नगरपालिका या पंचायत का जन्म प्रमाणपत्र देखा जाएगा। और केवल इन दस्तावेज़ों के अभाव में ossification test या कोई अन्य medical age determination test कराया जा सकता है. कोर्ट ने विशेष रूप से इस बात पर ज़ोर दिया कि section 94(iii) में प्रयुक्त “only” शब्द का अर्थ यही है कि मेडिकल टेस्ट अंतिम विकल्प है, पहला नहीं।
कोर्ट की मुख्य reasoning
Justice Manish Kumar ने माना कि चाहे हाई स्कूल certificate लिया जाए या Class V scholar register, दोनों से एक ही निष्कर्ष निकलता है कि revisionist घटना के समय 16 वर्ष से कम था। ऐसे में Board के पास ossification test का आदेश देने का कोई वैधानिक आधार नहीं था। अदालत ने साफ कहा कि जब documentary record खुद उम्र साबित कर रहा हो, तब मेडिकल परीक्षण का आदेश section 94 की scheme के विपरीत है।
फैसले का निचोड़
हाईकोर्ट ने यह माना कि JJB और appellate court दोनों ने कानून की सही व्याख्या नहीं की। क्योंकि उपलब्ध दस्तावेज़ों से juvenility का प्रश्न स्पष्ट था, इसलिए ossification test का आदेश अनावश्यक था। परिणामस्वरूप, हाईकोर्ट ने criminal revision allow कर दी।
इस फैसले का कानूनी महत्व
यह निर्णय juvenile justice jurisprudence के लिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह दो बातें स्पष्ट करता है। पहली, documentary proof has primacy in age determination. दूसरी, age determination को लेकर Boards और courts को section 94 की statutory hierarchy का पालन करना होगा। केवल दस्तावेज़ों में हल्का अंतर होने से medical test का रास्ता नहीं खुल जाता, खासकर तब जब दोनों दस्तावेज़ minor age की ओर ही संकेत कर रहे हों।
व्यावहारिक असर
इस फैसले का सीधा प्रभाव उन मामलों पर पड़ेगा जहाँ JJB या trial courts, उपलब्ध school records के बावजूद, medical age test कराने की ओर बढ़ जाते हैं। हाईकोर्ट ने संकेत दिया है कि ऐसा करना routine practice नहीं हो सकता। पहले यह देखना होगा कि क्या उपलब्ध प्रमाणपत्र उम्र को पर्याप्त रूप से स्थापित कर रहे हैं। यदि हाँ, तो ossification test कराना कानूनन उचित नहीं होगा।
एक पंक्ति में फैसला
जब उम्र दस्तावेज़ों से सिद्ध हो रही हो, तब बोन ऑसिफिकेशन टेस्ट नहीं; section 94 JJ Act में मेडिकल टेस्ट केवल दस्तावेज़ों के अभाव का उपाय है।