\इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण निर्णय में कहा है कि पत्नी के भरण-पोषण की राशि तय करते समय उसकी पेशेवर योग्यता, कार्य-अनुभव और कमाने की वास्तविक क्षमता को पूरी तरह नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता। अदालत ने स्पष्ट किया कि section 125 CrPC का उद्देश्य पत्नी को सम्मानजनक जीवन देना है, लेकिन इसका यह अर्थ नहीं है कि न्यायालय दावेदार की योग्यता और earning potential को देखे बिना अत्यधिक maintenance तय कर दे।
यह फैसला Binay Kushwaha vs. State of U.P. and Another, Criminal Revision No. 2132 of 2025, में माननीय न्यायमूर्ति मदन पाल सिंह ने 12 मार्च 2026 को दिया। हाईकोर्ट ने मैनपुरी फैमिली कोर्ट के 05 फरवरी 2025 के आदेश में संशोधन करते हुए maintenance की राशि को कम किया।
मामले में पति ने दलील दी थी कि पत्नी एक योग्य Radiologist है और वह Fortis Hospital, Gurugram में वर्ष 2014 से 2020 तक कार्य कर चुकी है। रिकॉर्ड से यह भी सामने आया कि उसने नौकरी स्वयं छोड़ी थी। दूसरी ओर, पत्नी की तरफ से कहा गया कि केवल शिक्षित या पहले नौकरी कर चुकी होने से maintenance से वंचित नहीं किया जा सकता, खासकर तब जब पति भारतीय सेना में Subedar के पद पर कार्यरत हो और लगभग ₹70,000 प्रतिमाह वेतन पाता हो।
हाईकोर्ट ने माना that mere earning or qualification of the wife by itself maintenance से पूर्ण इंकार का आधार नहीं है. अदालत ने सुप्रीम कोर्ट के निर्णय Shailja v. Khobbanna, (2018) 12 SCC 199 का हवाला देते हुए कहा कि असली कसौटी यह है कि पत्नी की आय या उसकी कमाने की क्षमता इतनी है या नहीं कि वह सम्मानपूर्वक अपना भरण-पोषण कर सके। लेकिन जहाँ रिकॉर्ड यह दिखाता हो कि पत्नी एक प्रशिक्षित medical professional है, पहले gainfully employed रही है, और उसके पास पर्याप्त earning capacity है, वहाँ maintenance की राशि तय करते समय इन तथ्यों की अनदेखी नहीं की जा सकती।
अदालत ने कहा कि इस मामले में पत्नी की पेशेवर योग्यता और पूर्व रोजगार स्पष्ट रूप से यह दर्शाते हैं कि वह कमाने में सक्षम है। इसलिए निचली अदालत द्वारा आदेश की तारीख से ₹18,000 प्रतिमाह maintenance देना अत्यधिक था। हाईकोर्ट ने आदेश में संशोधन करते हुए राशि को ₹12,000 प्रतिमाह कर दिया और यह भी निर्देश दिया कि यह राशि आवेदन दाखिल करने की तारीख से देय होगी।
यह निर्णय एक संतुलित सिद्धांत सामने रखता है। अदालत ने पत्नी के maintenance के अधिकार को नकारा नहीं, बल्कि यह कहा कि maintenance तय करते समय केवल पति की आय ही नहीं, बल्कि पत्नी की शिक्षा, पेशेवर क्षमता, पूर्व नौकरी और self-supporting potential को भी न्यायिक रूप से परखा जाना चाहिए। दूसरे शब्दों में, maintenance law सहानुभूति पर नहीं, बल्कि यथार्थपरक आर्थिक मूल्यांकन पर आधारित होना चाहिए।