इलाहाबाद हाईकोर्ट ने Ajay Verman v. State of U.P. and 2 Others, Criminal Revision No. 1108 of 2026, निर्णय दिनांक 12 मार्च 2026, में कहा कि पत्नी और नाबालिग बच्चे के भरण-पोषण की बढ़ी हुई राशि में केवल इस आधार पर हस्तक्षेप नहीं किया जा सकता कि पति पर माता-पिता, भाई-बहनों या अन्य पारिवारिक जिम्मेदारियों का बोझ है।

मामले में फैमिली कोर्ट, इटावा ने पत्नी का maintenance ₹3,500 से बढ़ाकर ₹8,000 प्रतिमाह और नाबालिग पुत्र का ₹1,500 से बढ़ाकर ₹4,000 प्रतिमाह कर दिया था। पति ने कहा कि वह रेलवे में Keyman है, लगभग ₹55,000 प्रतिमाह कमाता है, और अपनी आय से वृद्ध माता-पिता व अन्य परिवारजनों की भी मदद करता है।

हाईकोर्ट ने कहा कि maintenance का उद्देश्य पत्नी को दर-दर भटकने से बचाना और उसे गरिमा के साथ जीवन जीने योग्य आर्थिक सहारा देना है। अदालत ने साफ किया कि पत्नी का भरण-पोषण पति की primary legal responsibility है, जिससे वह अन्य पारिवारिक दायित्वों का हवाला देकर बच नहीं सकता।

कोर्ट ने यह भी कहा कि revisional jurisdiction सीमित होती है और जब तक आदेश में स्पष्ट illegality, perversity या material irregularity न हो, हाईकोर्ट दखल नहीं देगा। चूंकि फैमिली कोर्ट ने आय, सामाजिक स्थिति और आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर आदेश दिया था, इसलिए revision खारिज कर दी गई।