पेंशन और वेतन निर्धारण में जुड़ेगी सैन्य सेवा : कोर्ट
पूर्व सैनिक शिक्षक को आठ माह में बकाये का भुगतान करने का आदेश
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि यदि कोई पूर्व सैनिक सेना से सेवानिवृत्त होने के बाद सरकारी नौकरी में पुनर्नियुक्त होता है तो उसकी पिछली सैन्य सेवा को वेतन निर्धारण और पेंशन लाभ के लिए जोड़ा जाना अनिवार्य है।
यह आदेश न्यायमूर्ति गरिमा प्रसाद की एकल पीठ ने मैनपुरी के हवलदार सिंह की याचिका स्वीकार करते हुए शिक्षा विभाग को आठ सप्ताह के भीतर सभी बकाया भुगतान करने का आदेश दिया है।
याची हवलदार सिंह ने चार जुलाई 1981 से 31 जुलाई 1996 तक भारतीय नौसेना में सेवाएं दी थीं। वहां से सेवानिवृत्त होने के बाद उन्होंने बीटीसी प्रशिक्षण पूरा किया। 2011 में मैनपुरी के एक प्राथमिक विद्यालय में सहायक अध्यापक के पद पर नियुक्त हुए। 31 मार्च 2025 को सेवानिवृत्त होने के बाद उन्होंने 15 वर्ष की सैन्य सेवा को शिक्षा विभाग की सेवा के साथ जोड़ने की मांग की थी, जिस पर विभाग निर्णय नहीं ले पा रहा था।
इसके खिलाफ उन्होंने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। सुनवाई के दौरान स्थायी अधिवक्ता ने स्वीकार किया कि याची इस लाभ का हकदार है पर दलील दी कि एक अन्य समान मामले में प्रस्ताव शासन के पास लंबित है।
हालांकि, कोर्ट ने सरकार के इस रुख पर नाराजगी जताई। कहा कि प्रशासनिक प्रक्रियाएं कानूनी प्रावधानों से ऊपर नहीं हैं। एक बार जब विभाग याची की पात्रता को स्वीकार कर ले तो उसे प्रशासनिक अनुमोदन के नाम पर अनिश्चितकाल तक इंतजार नहीं कराया जा सकता।
WRIT – A No. – 51 of 2026 at Allahabad : Havaldar Singh Vs. State Of U.P. And 3 Others
Date of Judgment/Order – 19/3/2026
Court Number – In Chamber
Judgment Type – Final Non AFR
Coram – Hon’ble Garima Prashad,J.
Petitioner’s Counsels – Bhim Sen Pandey and Kartikey Pandey
Respondent’s Counsel – C.S.C. and Manvendra Singh