उत्तर प्रदेश राज्य लोक सेवा अधिकरण, लखनऊ ने Virendra Singh v. State of U.P. & Others (Claim Petition No. 174 of 2024, decided on 18 March 2026) में यह महत्वपूर्ण सिद्धांत दोहराया कि जहाँ departmental inquiry fair manner में conducted हुई हो, charged employee को adequate opportunity of defence मिली हो, witnesses का परीक्षण और cross-examination हुआ हो, तथा disciplinary authority ने reasoned order pass किया हो, वहाँ केवल technical pleas के आधार पर punishment order को quash नहीं किया जा सकता।
मामले में याची ने 1 जुलाई 2023 के दंडादेश को चुनौती दी थी, जिसके तहत उसे एक वर्ष के लिए न्यूनतम वेतनमान पर अवनत किया गया था। याची का कहना था कि जांच केवल प्रारंभिक जांच पर आधारित थी, मौखिक या दस्तावेजी साक्ष्य विधिवत सिद्ध नहीं किए गए, गवाहों के बयान दर्ज नहीं हुए और दंडाधिकारी ने बिना कारण बताए आदेश पारित कर दिया।
अधिकरण ने रिकॉर्ड देखकर पाया कि आरोपपत्र में जिन तीन गवाहों का उल्लेख था, उन्हें बुलाया गया, उनका परीक्षण किया गया और याची को cross-examination का पूरा अवसर भी दिया गया। अधिकरण ने यह भी माना कि जांच अधिकारी ने 16 February 2023 की तारीख नियत की थी, उसी दिन अभियोजन गवाहों का परीक्षण हुआ और बाद में याची को अपना पक्ष रखने का अवसर भी दिया गया। इसलिए यह तर्क स्वीकार नहीं किया गया कि आरोप केवल प्रारंभिक जांच के आधार पर सिद्ध कर दिए गए।
अधिकरण ने आगे कहा कि दंडाधिकारी का आदेश reasoned and speaking order है। आदेश में जांच अधिकारी की रिपोर्ट, उपलब्ध सामग्री और WhatsApp chatting तक पर विचार किया गया था। साथ ही अपीलीय प्राधिकारी ने भी अपील के बिंदुओं पर विचार करके आदेश पारित किया। इसलिए अधिकरण को कार्यवाही में कोई ऐसी कानूनी त्रुटि नहीं मिली, जिससे हस्तक्षेप किया जाए।
अंततः अधिकरण ने माना कि विभागीय जांच पूर्ण प्रक्रिया के साथ की गई, याची को पर्याप्त अवसर दिया गया और दंडादेश तथा अपीलीय आदेश विधिसम्मत हैं। इसी आधार पर Claim Petition No. 174 of 2024 को खारिज कर दिया गया।