इलाहाबाद हाईकोर्ट ने निर्वाचक नामावली (Voter List) के पुनरीक्षण के लिए एक शिक्षिका को बीएलओ (BLO) की ड्यूटी दिए जाने के खिलाफ दायर याचिका पर हस्तक्षेप से इनकार करते हुए याचिका का निस्तारण कर दिया। साथ ही, अदालत ने याचिकाकर्ता को संबंधित प्राधिकारी के समक्ष प्रत्यावेदन (Representation) देने की छूट प्रदान की।
यह आदेश न्यायमूर्ति मंजू रानी चौहान की एकल पीठ ने शामली की शिक्षिका की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया। याची शिक्षिका नीरज को शामली विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र में निर्वाचक नामावली के पुनरीक्षण कार्य के तहत बीएलओ की अतिरिक्त जिम्मेदारी सौंपी गई थी।
याचिका में मुख्य तर्क यह दिया गया कि शिक्षा का अधिकार अधिनियम, 2009 के तहत किसी शिक्षक/शिक्षिका को सामान्यतः गैर-शैक्षिक कार्य में नहीं लगाया जा सकता। इसी आधार पर बीएलओ ड्यूटी से मुक्त किए जाने की मांग की गई।
सरकार की ओर से दलील
राज्य सरकार और बेसिक शिक्षा अधिकारी की ओर से अदालत को बताया गया कि भारत निर्वाचन आयोग द्वारा 05 जून 2025 को जारी परिपत्र के माध्यम से बीएलओ नियुक्ति संबंधी दिशानिर्देशों में संशोधन किया गया है। संशोधित व्यवस्था के अनुसार, प्रत्येक निर्वाचन भाग के लिए समूह ‘सी’ और उससे ऊपर के नियमित राज्य/स्थानीय निकाय कर्मचारियों में से बीएलओ नियुक्त किया जाएगा। ऐसे कर्मचारी उपलब्ध न होने पर आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, संविदा शिक्षक या केंद्रीय कर्मचारियों को भी नियुक्त किया जा सकता है।
अंततः, हाईकोर्ट ने बीएलओ ड्यूटी से सीधे राहत देने के बजाय याचिकाकर्ता को संबंधित प्राधिकारी के समक्ष प्रत्यावेदन देने की अनुमति देते हुए याचिका का निस्तारण कर दिया।