मध्य प्रदेश हाईकोर्ट, जबलपुर ने Som Distilleries Pvt. Ltd. & Others v. State of Madhya Pradesh & Others, W.P. No. 4915 of 2026, में 23 मार्च 2026 को महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए याचिका खारिज कर दी और आबकारी विभाग द्वारा लाइसेंस निलंबन की कार्रवाई को सही माना।
मामला उन 8 आबकारी लाइसेंसों के निलंबन से जुड़ा था, जिन्हें याचिकाकर्ता कंपनियों ने चुनौती दी थी। कंपनियों का कहना था कि शो-कॉज नोटिस पुरानी लाइसेंस अवधि से संबंधित था, इसलिए बाद की अवधि के लाइसेंसों पर उसके आधार पर कार्रवाई नहीं की जा सकती। यह भी तर्क दिया गया कि नई लाइसेंस अवधि के लिए अलग कार्यवाही आवश्यक थी।
हाईकोर्ट ने यह दलील स्वीकार नहीं की। न्यायालय ने माना कि संबंधित आबकारी नियमों में लाइसेंस व्यवस्था केवल हर वर्ष पूर्णतः नए लाइसेंस की तरह नहीं है, बल्कि नवीनीकरण की शर्तों से जुड़ी है। इसलिए यदि पूर्व घटनाओं से यह सामने आता है कि लाइसेंसधारी या उसके behalf पर काम करने वालों ने गंभीर उल्लंघन किया है, तो आगे की अवधि में भी कार्रवाई संभव है।
कोर्ट ने धारा 31(1) और 31(1-A), मध्य प्रदेश आबकारी अधिनियम, 1915 का उल्लेख करते हुए कहा कि निलंबन से पहले कारण लिखित रूप में बताए गए, संक्षिप्त विवरण दिया गया और जवाब देने का अवसर भी दिया गया। इसलिए प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के उल्लंघन का तर्क टिक नहीं पाया।
न्यायालय ने यह भी माना कि यदि लाइसेंसधारी के सेवक, एजेंट या उसकी ओर से काम करने वाले व्यक्ति आबकारी अपराध, राजस्व-संबंधी अपराध या संज्ञेय एवं गैर-जमानती अपराध में दोषी पाए जाते हैं, तो उसका प्रभाव लाइसेंसधारी पर भी पड़ सकता है। आदेश में यह महत्वपूर्ण माना गया कि शराब के परिवहन में फर्जी परमिट के उपयोग और दोषसिद्धि से जुड़ी परिस्थितियों का याचिकाकर्ताओं ने अपने जवाब में ठोस खंडन नहीं किया।
कोर्ट ने यह भी कहा कि शराब का व्यापार कोई मौलिक अधिकार नहीं है। ऐसे क्षेत्र में राज्य को नियंत्रण और नियमन का व्यापक अधिकार है, विशेषकर तब जब मामला फर्जी परमिट, अवैध परिवहन और राजस्व-हानि जैसे गंभीर आरोपों से जुड़ा हो। इस दृष्टि से लाइसेंस निलंबन को न्यायालय ने अनुपातिक और विधिसम्मत माना।
अंततः हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि आबकारी आयुक्त का आदेश विधिसम्मत है और उसमें हस्तक्षेप का कोई आधार नहीं बनता। परिणामस्वरूप रिट याचिका खारिज कर दी गई। यह फैसला आबकारी लाइसेंसधारकों के लिए एक स्पष्ट संदेश है कि उनके कर्मचारियों, एजेंटों या behalf पर काम करने वालों के कृत्य भी लाइसेंस पर सीधा प्रभाव डाल सकते हैं।