प्रदेश के रियल एस्टेट क्षेत्र में घर और दुकान खरीदने वालों के लिए बड़ी राहत की खबर है। अब गैर पंजीकृत प्रमोटर भी यूपी रेरा (उत्तर प्रदेश भू संपदा विनियामक प्राधिकरण) के दायरे में आ गए हैं। अभी तक हजारों खरीदार प्रोजेक्ट पंजीकृत न होने के कारण खुद को ठगा महसूस कर रहे थे और विधिक राहत के लिए भटक रहे थे, लेकिन अब ऐसे आवंटी भी प्रभावी पैरवी के जरिए क्षतिपूर्ति और कब्जा प्राप्त कर सकेंगे। यूपी रेरा ने रेरा अधिनियम 2016 की धारा 85 के तहत अपने सामान्य विनियम-2019 के नियम 24 और 47 में 10वां महत्वपूर्ण संशोधन किया है, जो 25 मार्च से प्रभावी हो गया है। हालांकि, इस निर्णय से प्राधिकरण पर मुकदमों का बोझ बढ़ना तय है। वर्तमान में पंजीकृत प्रमोटरों से जुड़े 50 हजार से अधिक वाद पहले से लंबित हैं। सितंबर 2024 में सुप्रीम कोर्ट ने यूपी रेरा की कार्यप्रणाली पर तल्ख टिप्पणी करते हुए इसे ‘सेवानिवृत्त नौकरशाहों का पुनर्वास केंद्र’ बताया था। यूपी रेरा के अध्यक्ष संजय भूसरेड्डी ने बताया कि यह संशोधन रियल एस्टेट क्षेत्र में पारदर्शिता बढ़ाने और आवंटियों के हितों की रक्षा के लिए किया गया है।

इस तरह मिलेगी राहत

• गैर पंजीकृत परियोजनाओं के आवंटियों की शिकायतें अब प्राधिकरण की नियमित पीठों में सुनी जाएंगी। पीठ यह तय करेगी कि परियोजना को पंजीकरण से छूट प्राप्त है या नहीं, इसके बाद राहत प्रदान की जाएगी।

• चूंकि अपंजीकृत परियोजनाओं का डेटा रेरा के पास उपलब्ध नहीं होता, इसलिए जल्द ही पोर्टल पर ‘फार्म-एम’ के माध्यम से शिकायत दर्ज करने की सुविधा विकसित की जाएगी।

• यदि सुनवाई के दौरान बेंच यह पाती है कि परियोजना का पंजीकरण अनिवार्य है, तो वह सचिव को पंजीकरण की आवश्यक कार्रवाई के लिए अलग से संदर्भ भेजेगी।