इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि यदि सेवा नियमों में कोई स्पष्ट प्रावधान नहीं है, तो कर्मचारी के सेवानिवृत्त होने के बाद उसके विरुद्ध विभागीय कार्यवाही या रिकवरी हेतु शो-कॉज नोटिस जारी नहीं किया जा सकता। इस मामले में याची 31.07.2013 को सेवानिवृत्त हुए थे, जबकि पहला शो-कॉज नोटिस 07.11.2014 को और दूसरा 08.08.2022 को जारी किया गया। कोर्ट ने पाया कि लागू Rules, 1976 तथा Regulation, 1975 में सेवानिवृत्ति के बाद ऐसी कार्यवाही की अनुमति देने वाला कोई प्रावधान नहीं था, और सेवा अवधि में भी याची के विरुद्ध कोई विधिवत विभागीय जांच प्रारम्भ नहीं की गई थी।

अदालत ने यह भी महत्वपूर्ण माना कि 2014 के नोटिस पर उत्तर प्राप्त होने के बाद विभाग ने वर्षों तक कोई निर्णय नहीं लिया, और लगभग आठ वर्ष बाद उसी कारण से पुनः दूसरा नोटिस जारी कर दिया। कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के निर्णय Dev Prakash Tewari v. U.P. Cooperative Institutional Service Board, (2014) 7 SCC 260, तथा अन्य निर्णयों का अनुसरण करते हुए माना कि नियमों में प्रावधान के अभाव में सेवानिवृत्ति के बाद न तो विभागीय कार्यवाही जारी रखी जा सकती है और न ही सेवानिवृत्ति लाभों में कटौती की जा सकती है।

फलतः हाईकोर्ट ने दिनांक 07.11.2014 तथा 08.08.2022 के दोनों शो-कॉज नोटिस निरस्त कर दिए और निर्देश दिया कि याची के earned leave encashment, security तथा अन्य समस्त बकाया सेवानिवृत्ति लाभ वास्तविक भुगतान की तिथि तक 7% वार्षिक ब्याज सहित अदा किए जाएँ। यह निर्णय स्पष्ट करता है कि सेवानिवृत्ति के बाद की कार्यवाही केवल तभी संभव है जब संबंधित सेवा नियमों में उसका स्पष्ट वैधानिक आधार मौजूद हो।

Case Details
 Case WRIT – A No. 19256 of 2023 at Allahabad
 Petitioner Prem Kumar Tripathi
 Respondent The State Of Uttar Pradesh And Another
 Petitioner Counsels Anupam Kulshreshtha,Sanjay Mishra
 Respondent Counsels C.S.C.,Chandra Bhan Gupta,Sanjai Singh
 District Mainpuri