पंजाब राज्य सूचना आयोग (PSIC) ने हाल ही में एक अहम मामले में ऐसा फैसला दिया है, जो हर RTI आवेदक के लिए बहुत महत्वपूर्ण है। यह मामला मोहाली के एक आवेदक से जुड़ा था, जिसने Punjab State Warehousing Corporation से जुलाई 2023 से लंबित जानकारी मांगी थी। लेकिन विभाग ने जवाब में यह कह दिया कि “रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं है” या “फाइल ट्रेस नहीं हो रही”।
जब मामला आयोग के पास पहुंचा, तो सूचना आयुक्त डॉ. भूपिंदर बठ्ठ ने इस पर कड़ा रुख अपनाया। आयोग ने साफ कहा कि सिर्फ यह कह देना कि रिकॉर्ड नहीं मिल रहे, RTI के तहत सूचना देने से बचने का वैध आधार नहीं हो सकता।
आयोग ने अपने आदेश में यह भी कहा कि RTI Act, 2005 की धारा 4 के तहत हर सरकारी विभाग की यह कानूनी जिम्मेदारी है कि वह अपने रिकॉर्ड को ठीक से संभाले, सुरक्षित रखे और जरूरत पड़ने पर उपलब्ध कराए। अगर रिकॉर्ड गायब हैं, तो यह विभाग की प्रशासनिक कमी है—और इसका नुकसान नागरिक को नहीं उठाना चाहिए।
इस केस में आयोग ने विभाग को स्पष्ट निर्देश दिए:
👉 या तो मांगी गई सूचना उपलब्ध कराई जाए
👉 या फिर एक विस्तृत हलफनामा (affidavit) दाखिल किया जाए, जिसमें यह बताया जाए कि रिकॉर्ड खोजने के लिए क्या-क्या प्रयास किए गए
इसके साथ ही आयोग ने Managing Director (MD) को निर्देश दिया कि:
• रिकॉर्ड गायब होने की जांच कराई जाए
• जिम्मेदार अधिकारियों की पहचान की जाए
• अगली सुनवाई से पहले पूरी रिपोर्ट पेश की जाए
आयोग ने यह भी संकेत दिया कि रिकॉर्ड गायब होना एक गंभीर लापरवाही है, और इसके लिए संबंधित अधिकारियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई भी की जा सकती है।