सुप्रीम कोर्ट ने Raj Bahadur Singh v. State of Uttarakhand में साफ कहा कि जब शिकायतकर्ता का बयान, shadow witness का समर्थन, trap की प्रक्रिया, panchnama और phenolphthalein test एक-दूसरे को पुष्ट करते हों, तब मामूली विरोधाभासों या बाद में उठाई गई तकनीकी दलीलों के आधार पर भ्रष्टाचार के मामले में दोषसिद्धि निरस्त नहीं की जा सकती।

मामले में आरोपी आबकारी विभाग का constable था। आरोप था कि उसने शिकायतकर्ता से ₹500 की अवैध रिश्वत मांगी और धमकी दी कि पैसा न देने पर चालान अदालत भेज दिया जाएगा। शिकायत के बाद vigilance trap हुआ, पाँच ₹100 के नोट phenolphthalein powder से तैयार किए गए, और trap के दौरान वही राशि आरोपी से बरामद हुई। हाथ धोने पर घोल गुलाबी हुआ, जिससे trap process corroborate हुई।

सुप्रीम कोर्ट ने माना कि PW-1 शिकायतकर्ता ने मांग, धमकी, शिकायत और trap की पूरी घटना का विस्तृत व विश्वसनीय बयान दिया। PW-2 ने भी prosecution case को support किया। कोर्ट ने यह भी कहा कि केवल इस आधार पर कि PW-2 शिकायतकर्ता को जानता था, उसे “interested witness” नहीं कहा जा सकता; इसके लिए ठोस hostility या bias का material चाहिए।

आरोपी की ओर से यह दलील भी दी गई कि tainted currency notes अदालत में पेश नहीं किए गए। लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने इस तर्क को अस्वीकार कर दिया, क्योंकि यह आपत्ति न ट्रायल कोर्ट में उठाई गई थी, न हाईकोर्ट में, और न ही special leave petition के grounds में थी। कोर्ट ने कहा कि panchnama और record से handing over, acceptance, और phenolphthalein reaction की पूरी chain सिद्ध है।

इसलिए सुप्रीम कोर्ट ने Section 7 और Section 13(2) Prevention of Corruption Act के तहत conviction को बरकरार रखा। हालांकि, आरोपी की उम्र अपराध के समय लगभग 40 वर्ष और निर्णय के समय लगभग 75 वर्ष होने, तथा लगभग 2 महीने 24 दिन जेल में बिताने के आधार पर Court ने sentence कम कर दिया—Section 7 में 6 माह और Section 13(2) में 1 वर्ष का rigorous imprisonment रखा।

Serial Number Diary Number Case Number Petitioner Name Respondent Name Status Action
1 24246/2012 Crl.A. No. 001105 / 2013 Registered on 01-08-2013
SLP(Crl) No. 006379 / 2013 Registered on 03-08-2013
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