सूचना के अधिकार कानून से जुड़े एक महत्वपूर्ण निर्णय में केरल हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि RTI Act की धारा 20(1) के तहत SPIO के खिलाफ चलने वाली penalty proceedings में शिकायतकर्ता या appellant को स्वतः सुनवाई का अधिकार नहीं होता। अदालत ने कहा कि ऐसी दंड कार्यवाही मूलतः Information Commission और संबंधित SPIO के बीच का मामला है।

यह फैसला Raisa Eapen v. State of Kerala & Ors., WP(C) No. 8876 of 2026, निर्णय दिनांक 09 मार्च 2026, Justice Murali Purushothaman द्वारा दिया गया। निर्णय का neutral citation 2026:KER:21070 है।

मामला क्या था

याचिकाकर्ता Raisa Eapen ने Kerala Conservation of Paddy Land and Wetland Act, 2008 के तहत अपनी भूमि के reclassification के लिए Form-6 आवेदन दिया था। उनका कहना था कि उनका आवेदन Revenue Adalat में लिया जाना चाहिए था, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। इसके बाद उन्होंने 18.05.2024 को संबंधित SPIO से RTI application देकर सूचना मांगी। तय 30 दिनों की अवधि में सूचना न मिलने पर उन्होंने State Information Commission के समक्ष second appeal दायर की।

बाद में State Information Commission ने पाया कि सूचना समय पर नहीं दी गई और prima facie यह भी माना कि SPIO ने गलत या misleading information दी है, इसलिए धारा 20(1) के तहत show cause जारी किया गया कि उस पर penalty क्यों न लगाई जाए। इसके जवाब में SPIO ने कहा कि देरी चुनावी मतगणना के काम, staff transfer और e-office ID allotment में delay जैसी प्रशासनिक वजहों से हुई, और कोई जानबूझकर चूक नहीं थी। Commission ने यह explanation स्वीकार कर लिया और penalty proceedings drop कर दीं।

याचिकाकर्ता की दलील

याचिकाकर्ता ने हाईकोर्ट में कहा कि State Information Commission ने SPIO को बिना उनकी बात सुने राहत दे दी। उनका तर्क था कि SPIO का explanation उन्हें उपलब्ध नहीं कराया गया, उन्हें rebuttal का अवसर नहीं मिला, और Commission ने पहले के adverse observations के बावजूद final stage पर proceedings drop कर दीं। उन्होंने यह भी चाहा कि SPIO पर धारा 20(1) के तहत penalty और धारा 20(2) के तहत disciplinary action हो, साथ ही compensation भी मिले।

हाईकोर्ट ने क्या कहा

हाईकोर्ट ने धारा 20 का विश्लेषण करते हुए कहा कि इस provision में स्पष्ट रूप से केवल CPIO/SPIO को penalty लगाने से पहले reasonable opportunity of being heard देने की बात कही गई है। कानून में कहीं भी यह नहीं कहा गया कि penalty proceedings में appellant या complainant को भी अनिवार्य रूप से सुना जाए। अदालत ने विशेष रूप से यह रेखांकित किया कि Section 19(8)(b) के तहत compensation का प्रश्न अलग है, क्योंकि compensation complainant को मिलता है और उसके लिए loss or detriment का adjudication आवश्यक हो सकता है। लेकिन Section 20 की penalty राज्य को जाती है, complainant को नहीं। इसी कारण penalty proceeding का character अलग है।

अदालत ने आगे कहा कि Kerala State Information Commission (Procedure for Appeal) Rules, 2006 के Rule 7 के अनुसार appellant की personal presence अनिवार्य नहीं है, बल्कि optional है। यानी appellant चाहे तो उपस्थित हो, चाहे न हो, Commission appeal का निस्तारण कर सकता है। इस statutory scheme को देखते हुए कोर्ट ने माना कि penalty proceedings में complainant की भागीदारी कोई vested right नहीं है।

सबसे महत्वपूर्ण तौर पर हाईकोर्ट ने कहा कि Section 20(1) की penalty proceedings में petitioner को सुनवाई का अधिकार नहीं है, जब तक State Information Commission स्वयं इसकी अनुमति न दे। कोर्ट ने यह भी कहा कि show cause stage पर Commission की राय केवल prima facie होती है। यदि बाद में SPIO का explanation संतोषजनक पाया जाता है, तो Commission penalty proceedings drop कर सकता है। इस मामले में ऐसा करना न तो illegal था और न ही perverse। इसलिए writ petition खारिज कर दी गई।

निर्णय का महत्व

यह फैसला RTI litigation में एक महत्वपूर्ण principle स्थापित करता है। अक्सर applicants यह मान लेते हैं कि यदि Information Commission ने SPIO को show cause notice जारी कर दिया, तो penalty लगभग तय है। केरल हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि ऐसा नहीं है। Show cause केवल prima facie stage है। अंतिम निर्णय Commission को SPIO का explanation सुनकर लेना होता है।

यह निर्णय यह भी बताता है कि RTI applicant का मुख्य अधिकार सूचना प्राप्त करना और उचित मामलों में compensation मांगना हो सकता है, लेकिन SPIO को दंडित करवाना उसका व्यक्तिगत अधिकार नहीं है। दंड कार्यवाही का उद्देश्य public law accountability है, न कि complainant को व्यक्तिगत remedial hearing देना।

निष्कर्ष

केरल हाईकोर्ट का यह फैसला RTI Act की धारा 20 की प्रकृति को स्पष्ट करता है। अदालत ने साफ कहा कि SPIO के खिलाफ penalty proceedings में complainant को स्वतः सुनवाई का अधिकार नहीं है। यदि Commission चाहे तो उसे सुन सकता है, लेकिन यह उसका अधिकार नहीं, बल्कि आयोग का विवेकाधिकार है। इसलिए RTI applicants के लिए यह समझना जरूरी है कि penalty under section 20 और compensation under section 19(8)(b) दो अलग कानूनी अवधारणाएँ हैं, और दोनों की प्रक्रिया भी अलग है।