डीजल लोकोमोटिव के जीएम ने केंद्रीय सूचना आयोग के फैसले को दी थी चुनौती, हाईकोर्ट ने कहा-कोई दूसरे उम्मीदवार का अंक जानना चाहता है तो विभाग तीसरे पक्ष की गोपनीयता का हवाला देकर इसे रोक नहीं सकता
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि सार्वजनिक भर्ती परीक्षाओं में प्राप्त अंक गोपनीय सूचना की श्रेणी में नहीं आते हैं। सूचना का अधिकार अधिनियम – 2005 के तहत किसी दूसरे अभ्यर्थी के अंकों की जानकारी दी जा सकती है पर उत्तर पुस्तिका की फोटोकॉपी देना अनिवार्य नहीं है। यह आदेश न्यायमूर्ति अजीत कुमार, न्यायमूर्ति स्वरूपमा चतुर्वेदी की खंडपीठ ने डीजल लोकोमोटिव के जीएम और अन्य की याचिका पर दिया है।
यह मामला वाराणसी स्थित डीजल लोकोमोटिव वर्क्स में वर्ष 2008 में आयोजित विधि सहायक भर्ती परीक्षा से जुड़ा है। इसमें शामिल एक अभ्यर्थी ने आरटीआई के तहत अपने साथ दो अन्य सफल अभ्यर्थियों के प्राप्तांकों और उत्तर पुस्तिकाओं की प्रतियों की मांग की थी। विभाग ने उस समय अंक की जानकारी देने से इंकार कर दिया था, लेकिन उत्तर पुस्तिकाओं के अवलोकन की अनुमति दी थी।
मामला सामने आने पर केंद्रीय सूचना आयोग ने विभाग को उत्तर पुस्तिकाओं की प्रतियां उपलब्ध कराने का निर्देश दिया। इस पर विभाग ने आदेश के खिलाफ हाईकोर्ट में याचिका दायर की। कोर्ट ने कहा कि आरटीआई का मुख्य उद्देश्य सार्वजनिक गतिविधियों में पारदर्शिता लाना है। भर्ती परीक्षाएं एक सार्वजनिक प्रक्रिया हैं। इसलिए इनमें प्राप्त किए गए अंक भी सार्वजनिक गतिविधि का हिस्सा बन सकते हैं। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यदि कोई अभ्यर्थी चयन प्रक्रिया की शुचिता जांचने के लिए दूसरे उम्मीदवार का अंक जानना चाहता है तो विभाग ‘तीसरे पक्ष की गोपनीयता’ का हवाला देकर इसे रोक नहीं सकता। हालांकि, कोर्ट ने उत्तर पुस्तिकाओं की फोटोकॉपी देने के मामले में विभाग को राहत दी है।
उत्तर पुस्तिका का केवल निरीक्षण या अवलोकन की अनुमति देना कानूनन पर्याप्त: हाईकोर्ट ने कहा कि किसी दूसरे अभ्यर्थी की उत्तर पुस्तिका की प्रति प्राप्त करना एक कानूनी अधिकार के रूप में नहीं माना जा सकता। उत्तर पुस्तिकाओं में परीक्षकों के हस्ताक्षर, विशेष अंकन पद्धतियां या अन्य ऐसी संवेदनशील जानकारियां हो सकती हैं, जिन्हें सार्वजनिक करना सुरक्षा या प्रशासनिक दृष्टि से उचित नहीं है। ऐसी स्थिति में विभाग की ओर से आवेदक को उत्तर पुस्तिका का केवल निरीक्षण या अवलोकन करने की अनुमति देना कानूनन पर्याप्त माना जाएगा। कोर्ट ने यह भी कहा कि यदि किसी मामले में कोई आधिकारिक जांच लंबित हो तो केवल उसी स्थिति में सूचना को अस्थायी रूप से रोका जा सकता है।
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