UPSC अभ्यर्थियों के इंटरव्यू और नाम के प्रचारात्मक इस्तेमाल पर बहस तेज
क्या कोई कोचिंग संस्थान किसी UPSC अभ्यर्थी का मॉक इंटरव्यू उसकी सहमति के बिना ऑनलाइन प्रकाशित कर सकता है? यह सवाल एक आरटीआई आवेदन के जरिए उपभोक्ता मामले विभाग के समक्ष उठाया गया, जिससे कोचिंग संस्थानों द्वारा अभ्यर्थियों के इंटरव्यू और व्यक्तिगत विवरण के इस्तेमाल का मुद्दा चर्चा में आ गया है।
आरटीआई आवेदन में पूछा गया था कि यदि कोई अभ्यर्थी संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी के दौरान मॉक इंटरव्यू देता है, लेकिन बाद में उसके प्रकाशन पर आपत्ति जताता है, तो क्या कोचिंग संस्थान फिर भी उसे ऑनलाइन अपलोड कर सकता है।
हालांकि, उपभोक्ता मामले विभाग ने अपने जवाब में कहा कि यह प्रश्न सलाह, कानूनी राय या स्पष्टीकरण मांगने की प्रकृति का है। इसलिए यह सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 की धारा 2(फ) के तहत “सूचना” की परिभाषा में नहीं आता। बाद में केंद्रीय सूचना आयोग ने भी विभाग के इस उत्तर को उचित मानते हुए अपील खारिज कर दी।
आवेदक शशांक गौर ने अपने आवेदन में विशेष रूप से पूछा था कि क्या कोचिंग संस्थान को मॉक इंटरव्यू प्रकाशित करने का अधिकार है, क्या अभ्यर्थी उसके प्रकाशन से मना कर सकता है, या फिर संस्थान बिना उसकी सहमति के भी ऐसा कर सकते हैं।
आवेदन में यह भी कहा गया कि ऐसी स्थिति तब उत्पन्न हो सकती है जब कोई अभ्यर्थी तैयारी के शुरुआती दौर में मॉक इंटरव्यू दे और उसका प्रदर्शन कमजोर रहे, लेकिन बाद में वह काफी सुधार कर ले। यदि परिणाम घोषित होने के बाद कोचिंग संस्थान उसी पुराने इंटरव्यू को सार्वजनिक कर दे, तो इससे उम्मीदवार की नकारात्मक छवि बन सकती है और सोशल मीडिया पर प्रतिकूल टिप्पणियां भी हो सकती हैं।
आरटीआई में एक अन्य महत्वपूर्ण सवाल कोचिंग संस्थानों द्वारा छात्रों के नाम के प्रचारात्मक उपयोग को लेकर भी उठाया गया। इसमें पूछा गया कि यदि किसी छात्र ने खरीदा गया कोर्स इस्तेमाल नहीं किया और परिणाम आने के बाद वह नहीं चाहता कि उसका नाम उस कोर्स के प्रचार में इस्तेमाल हो, तो क्या कोचिंग संस्थान फिर भी उसका नाम प्रकाशित कर सकते हैं। आवेदन में यह भी सवाल उठाया गया कि क्या इसके लिए छात्र की सहमति आवश्यक नहीं होनी चाहिए।
यह मुद्दा ऐसे समय में सामने आया है जब UPSC सिविल सेवा परीक्षा 2025 के परिणाम शुक्रवार को घोषित हुए। परिणाम आने के बाद कोचिंग संस्थान अक्सर सफल अभ्यर्थियों के नाम, इंटरव्यू और प्रोफाइल का इस्तेमाल अपने प्रचार के लिए करते हैं।
भले ही आरटीआई के माध्यम से इस प्रश्न का सीधा कानूनी उत्तर नहीं मिला, लेकिन इसने कोचिंग संस्थानों की कार्यप्रणाली, अभ्यर्थियों की निजता और सहमति के महत्व पर एक गंभीर बहस जरूर छेड़ दी है।
| S.No | File No. | Applicant Name | Public Authority | IC Name | Decision Uploaded On | Order Date | View Decision |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| 1 | CIC/DOCAF/A/2024/644545 | Shashank Gaur | Department of Consumer Affairs | Khushwant Singh Sethi | 15/01/2026 | 15/01/2026 | Click here |