उत्तर प्रदेश सरकार (स्टाम्प एवं निबंधन विभाग) ने 04 सितम्बर 2025 को जारी दो अलग-अलग अधिसूचनाओं के जरिए पैतृक अचल संपत्ति के विभाजन विलेख (Partition Deed) पर लगने वाले स्टाम्प शुल्क और रजिस्ट्रीकरण (Registration) शुल्क—दोनों में राहत दी है। इनका लाभ उन्हीं मामलों में मिलेगा, जहाँ विभाजन अधिकतम तीन पीढ़ियों के पारम्परिक वंशजों के बीच हो और अन्य शर्तें पूरी हों।

1) क्या बदला है?

(A) स्टाम्प ड्यूटी: अब अधिकतम ₹5,000

अधिसूचना (स्टाम्प ड्यूटी) के अनुसार, भारतीय स्टाम्प अधिनियम, 1899 के तहत विभाजन विलेख पर स्टाम्प शुल्क में छूट देकर अधिकतम स्टाम्प ड्यूटी ₹5,000 तय की गई है—जब विभाजन पैतृक अचल संपत्ति का हो और वह तीन पीढ़ियों से अधिक के वंशजों के बीच न हो।

(B) रजिस्ट्रीकरण शुल्क: अब अधिकतम ₹5,000

दूसरी अधिसूचना (रजिस्ट्री फीस) के अनुसार, रजिस्ट्रेशन एक्ट, 1908 के अंतर्गत ऐसे ही विभाजन विलेख पर रजिस्ट्रीकरण शुल्क में छूट देकर अधिकतम रजिस्ट्री फीस ₹5,000 तय की गई है।

निष्कर्ष: यदि आपका मामला दोनों अधिसूचनाओं की शर्तों में आता है, तो सामान्यतः

  • स्टाम्प ड्यूटी अधिकतम ₹5,000, और

  • रजिस्ट्री फीस अधिकतम ₹5,000
    यानी कुल मिलाकर इन दो मदों में अधिकतम ₹10,000 तक की सीमा बनती है (अन्य वैधानिक/सेवा शुल्क अलग हो सकते हैं)।

2) यह लाभ किन “विभाजन विलेखों” पर मिलेगा?

यह राहत केवल उन विभाजन विलेखों पर है जो:

  1. पैतृक अचल संपत्ति के विभाजन से संबंधित हों, और

  2. अनधिक तीन पीढ़ी के पारम्परिक/रेखीय वंशजों के बीच हों।

3) अनिवार्य शर्तें (बहुत महत्वपूर्ण)

सरकार ने छूट/सीमा का लाभ चार स्पष्ट शर्तों से बांधा है:

  1. विभाजन उत्तराधिकार कानून के अनुरूप हो
    छूट उसी विभाजन विलेख पर मिलेगी, जहाँ पैतृक संपत्ति का बंटवारा विद्यमान उत्तराधिकार विधियों के अनुसार किया गया हो।

  2. पीढ़ियों की “पारिवारिक वंशावली (Family Tree)” देना अनिवार्य
    पैतृक संबंध स्थापित करने के लिए विलेख में तीन पीढ़ियों का उल्लेख करते हुए पारिवारिक वंशावली प्रस्तुत करना अनिवार्य है।

  3. केवल वास्तविक व्यक्तियों की संपत्ति—फर्म/ट्रस्ट/कंपनी आदि पर नहीं
    छूट केवल वास्तविक व्यक्तियों की संपत्तियों के विभाजन पर मिलेगी; फर्म, सोसायटी, ट्रस्ट, कंपनी जैसी इकाइयों की संपत्ति पर यह लाभ नहीं मिलेगा।

  4. संपत्ति का प्रकार: कृषि/आवासीय/वाणिज्यिक तक सीमित
    छूट केवल कृषि, आवासीय या वाणिज्यिक संपत्तियों के विभाजन पर है; औद्योगिक/संस्थागत प्रकृति की संपत्ति पर यह छूट नहीं मिलेगी।

4) कब से लागू है?

दोनों अधिसूचनाएँ गजट में प्रकाशित होने की तिथि से प्रभावी मानी गई हैं।