केंद्रीय कर्मचारियों, पेंशनरों और उनके आश्रितों के लिए स्वास्थ्य संबंधी खर्चों को लेकर एक महत्वपूर्ण राहत की खबर सामने आई है। सेंट्रल गवर्नमेंट हेल्थ स्कीम (CGHS) के लाभार्थियों को अब अस्पताल में भर्ती होने की स्थिति में इलाज पर हुए खर्च की प्रतिपूर्ति (Medical Reimbursement) 10 लाख रुपये तक स्थानीय स्तर पर ही मिल सकेगी। इसका सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि भुगतान/प्रतिपूर्ति के लिए लंबा इंतजार नहीं करना पड़ेगा।
क्या बदला है?
अब तक व्यवस्था यह थी कि यदि इलाज पर खर्च 5 लाख रुपये से अधिक हो जाता था, तो प्रतिपूर्ति के लिए केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय (MoHFW) के आंतरिक वित्त प्रभाग (IFD-Internal Finance Division) की सहमति लेनी पड़ती थी। यह प्रक्रिया अतिरिक्त स्तरों पर फाइल जाने के कारण अक्सर समय लेने वाली बन जाती थी।
नई व्यवस्था के तहत:
- 5 लाख से ऊपर और 10 लाख रुपये तक के प्रतिपूर्ति मामलों में
- आंतरिक वित्त प्रभाग (IFD) की सहमति की आवश्यकता नहीं होगी
- और CGHS के अपर निदेशक स्तर से ही प्रतिपूर्ति/स्वीकृति कर दी जाएगी।
यानी, निर्णय-प्रक्रिया स्थानीय स्तर पर होने से मामलों के निपटान में तेजी आएगी।
किसे होगा लाभ?
इस बदलाव का लाभ मुख्य रूप से:
- केंद्रीय कर्मचारी
- केंद्रीय पेंशनर
- उनके आश्रित (Dependents)
इन सभी को मिलेगा। खासकर उन मामलों में राहत ज्यादा होगी जहाँ इलाज का खर्च बड़ा होता है और प्रतिपूर्ति फाइल “ऊपर” जाने के कारण देरी होती थी।
सीमा 2 लाख से 5 लाख और अब 10 लाख तक: पृष्ठभूमि
पहले प्रतिपूर्ति की अधिकतम सीमा 5 लाख रुपये थी, जिसे अब बढ़ाकर 10 लाख रुपये कर दिया गया है। इससे पहले 23 नवंबर 2016 को जारी आदेश के तहत यह सीमा 2 लाख से बढ़ाकर 5 लाख रुपये की गई थी। अब एक बार फिर सीमा बढ़ने से बड़े इलाज खर्चों में लाभार्थियों को मजबूत सहारा मिलेगा।
कैशलेस बनाम प्रतिपूर्ति: क्या व्यवस्था रहेगी?
CGHS के पैनल में शामिल निजी अस्पतालों में भर्ती होने पर सामान्यतः कैशलेस सुविधा उपलब्ध रहती है। लेकिन यदि किसी कारणवश पैनल से बाहर के अस्पताल में इलाज कराना पड़े, तो ऐसे मामलों में इलाज पर हुए खर्च की प्रतिपूर्ति का प्रावधान लागू होता है। नई सीमा/स्थानीय स्वीकृति व्यवस्था ऐसे ही प्रतिपूर्ति मामलों में देरी कम करने में मदद करेगी।
निष्कर्ष
कुल मिलाकर यह निर्णय CGHS लाभार्थियों—विशेषकर केंद्रीय कर्मचारियों, पेंशनरों और आश्रितों—के लिए एक बड़ा राहत कदम है। 10 लाख रुपये तक की प्रतिपूर्ति स्थानीय स्तर पर होने से इलाज के बाद प्रतिपूर्ति पाने की प्रक्रिया तेज होगी और लंबे इंतजार की समस्या काफी हद तक कम हो सकेगी।