इलाहाबाद हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में स्पष्ट किया है कि यदि कोई वाहन बिक चुका है लेकिन परिवहन विभाग (RTO) के रिकॉर्ड में अभी भी पुराने मालिक का नाम दर्ज है, तो दुर्घटना की स्थिति में मुआवजे की पूरी जिम्मेदारी पंजीकृत मालिक (Registered Owner) की ही होगी।
इस महत्वपूर्ण व्यवस्था के मुख्य बिंदु निम्नलिखित हैं:
सरकारी रिकॉर्ड ही मान्य: मोटर वाहन अधिनियम की धारा 50 के तहत, जब तक स्वामित्व हस्तांतरण (Transfer of Ownership) की प्रक्रिया सरकारी कागजों में पूरी नहीं हो जाती, तब तक कानून की नजर में वही व्यक्ति ‘मालिक’ है जिसका नाम रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट (RC) में है।
बीमा कंपनी की जवाबदेही: सुप्रीम कोर्ट ने बृज बिहारी गुप्ता बनाम मनमीत मामले में फैसला सुनाया कि बीमा कंपनी भी अपनी जिम्मेदारी से पीछे नहीं हट सकती। यदि रजिस्ट्रेशन ट्रांसफर नहीं हुआ है, तो बीमा कंपनी को पंजीकृत मालिक की ओर से पीड़ित को मुआवजा देना होगा।
निजी समझौते का महत्व नहीं: केवल सेल लेटर या आपसी एग्रीमेंट पर हस्ताक्षर कर देने से पुराना मालिक अपनी कानूनी जिम्मेदारी से मुक्त नहीं होता। दुर्घटना की स्थिति में कोर्ट केवल सरकारी रिकॉर्ड (RTO Records) को ही आधार मानता है।
पीड़ितों का संरक्षण: अदालतों का मानना है कि तकनीकी खामियों या ट्रांसफर में देरी के कारण हादसे के शिकार लोगों को मुआवजे के लिए दर-दर नहीं भटकना चाहिए।
सावधानी के लिए सुझाव:
वाहन बेचते समय केवल एग्रीमेंट पर निर्भर न रहें। तुरंत परिवहन सेवा पोर्टल के माध्यम से ऑनलाइन स्वामित्व हस्तांतरण के लिए आवेदन करें और सुनिश्चित करें कि खरीदार के नाम पर नई RC जारी हो गई है।