इलाहाबाद हाईकोर्ट के हालिया दृष्टिकोण के अनुसार गैंगस्टर एक्ट (U.P. Gangsters Act) केवल एक (1) आपराधिक मामले के आधार पर भी लगाया जा सकता है। आम धारणा यह रहती है कि गैंगस्टर एक्ट के लिए कई मुकदमे जरूरी हैं, लेकिन कोर्ट का संकेत है कि मामलों की संख्या से अधिक अपराध की प्रकृति, “गैंग” तत्व और रिकॉर्ड पर उपलब्ध सामग्री महत्वपूर्ण है।
हालाँकि इसका मतलब यह नहीं कि हर एकल एफआईआर में स्वतः गैंगस्टर एक्ट लग जाएगा। अदालत सामान्यतः यह देखती है कि क्या मामला संगठित रूप से, अवैध लाभ/वर्चस्व/डर-धमकी के उद्देश्य से, गैंग/समूह के रूप में किया गया प्रतीत होता है या नहीं।
खास बात यह है कि Rule-22/सक्षम अधिकारी की “संतुष्टि” (यानी रिकॉर्ड देखकर विचारपूर्वक अनुमोदन) बहुत अहम है। यदि गैंग-चार्ट/डोजियर और अनुमोदन यांत्रिक या बिना पर्याप्त सामग्री के हो, तो चुनौती का आधार बन सकता है।
साथ ही, केवल यह तर्क कि “मूल केस में जमानत मिल गई” अपने आप में गैंगस्टर एक्ट को खत्म नहीं करता—बचाव के लिए गैंग तत्व की कमी और प्रक्रियागत त्रुटि दिखाना जरूरी होता है।
निष्कर्ष: एक मामला भी पर्याप्त हो सकता है, पर प्रक्रिया और सामग्री मजबूत होनी चाहिए।
📌 जजमेंट/संदर्भ:
APPLICATION U/S 528 BNSS No. – 43062 of 2025 at Allahabad : Smt. Jyoti Suri Vs. State Of U.P. And 2 Others
Date of Judgment/Order – 5/2/2026
Court Number – 81
Judgment Type – Final AFR
Coram – Hon’ble Vivek Kumar Singh,J.
Petitioner’s Counsels – Mandvi Tripathi and Santosh Tripathi
Respondent’s Counsel – G.A. and Surendra Tiwari