दिल्ली हाईकोर्ट ने इंटरनेट मीडिया पर अपमानजनक पोस्ट से संबंधित मामले में कहा है कि संविधान में अभिव्यक्ति की आजादी महत्वपूर्ण अधिकार है, लेकिन इसका उपयोग मानहानिकारक या दुर्भावनापूर्ण सामग्री डालने के लिए नहीं किया जा सकता। इसका प्रयोग दूसरों के अधिकारों के उल्लंघन के लिए नहीं होना चाहिए। न्यायमूर्ति ज्योति सिंह की पीठ ने स्पष्ट किया कि मान-सम्मान का अधिकार अनुच्छेद 21 के तहत जीवन के अधिकार का अभिन्न हिस्सा है। पीठ ने कहा कि अभिव्यक्ति की आजादी व मान-सम्मान के अधिकार के बीच संतुलन बनाना संविधान की मूल व्यवस्था का जरूरी तत्व है। कोर्ट ने टिप्पणी पूर्व कर्मी द्वारा फिजिक्सवाला के खिलाफ की गई इंटरनेट मीडिया पोस्ट को हटाने के आदेश के संदर्भ में की।

Download: Physicswallah Limited v. Nikhil Kumar Singh & Ors. (CS(COMM) 70/2026), Order dated 23-01-2026 (PDF)