● सरकारी कर्मचारियों की आचरण नियमावली में संशोधन को आज कैबिनेट से मिल सकती है स्वीकृति
● छह माह के मूल वेतन से अधिक शेयर बाजार में लगाने पर देना होगा ब्यौरा, दो माह के वेतन से अधिक की चल संपत्ति लेनदेन बताना होगा
लखनऊ : प्रदेश सरकार भ्रष्टाचार पर जीरो टालरेंस नीति के तहत अब राज्य कर्मचारियों के निवेश और संपत्ति से जुड़े नियमों को और सख्त करने जा रही है। यदि कोई राज्य कर्मचारी एक कैलेंडर वर्ष में छह माह के मूल वेतन से अधिक की राशि स्टॉक, शेयर या अन्य निवेश माध्यमों में लगाता है तो उसे इसकी जानकारी देना अनिवार्य होगा। वर्तमान नियमावली में इसका कोई प्राविधान नहीं है। इसके लिए सरकार उत्तर प्रदेश राज्य कर्मचारियों की आचरण नियमावली, 1956 में संशोधन करने जा रही है।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में मंगलवार को कैबिनेट मंत्री की बैठक में उत्तर प्रदेश सरकारी कर्मचारियों की आचरण (संशोधन) नियमावली 2026 को स्वीकृति मिल सकती है। केंद्र सरकार की तर्ज पर कार्मिक विभाग ने नियमावली में संशोधन का प्रस्ताव तैयार किया है। इस प्रस्ताव के तहत कोई कर्मचारी दो माह के मूल वेतन से अधिक मूल्य की चल संपत्ति से जुड़ा कोई लेन-देन करता है, तो उसे तत्काल इसकी सूचना संबंधित प्राधिकारी को देनी होगी।
अब सभी सरकारी कर्मचारियों को हर वर्ष अचल संपत्ति का विवरण देना अनिवार्य होगा। नए प्राविधान के तहत कर्मचारियों को प्रथम नियुक्ति के समय और उसके बाद प्रत्येक वर्ष अपनी अचल संपत्तियों की घोषणा करनी होगी। अभी यह घोषणा हर पांच वर्ष में करने का नियम है। हालांकि, शासनादेश के जरिए सरकार हर वर्ष कर्मचारियों से संपत्ति का ब्यौरा लेती है किंतु अब उसे नियमावली में बदलाव कर और सख्त करने जा रही है। नियमों के तहत कर्मचारियों को अपनी या अपने परिवार के सदस्यों के नाम पर अर्जित, दान में प्राप्त, पट्टे या रेहन पर रखी गई संपत्तियों तथा अन्य निवेशों का पूरा ब्यौरा देना होगा।