Claim Petition No. 1823 of 2023
Rohit Saxena & Ors. v. State of U.P. & Ors.
आदेश दिनांक: 26 फरवरी 2026 (Court No. VIII, Vice-Chairman: K. Ravinder Naik)

मामला क्या था?

इस प्रकरण में जिला चिकित्सालय (पुरुष), बदायूं में कार्यरत कुछ आउटसोर्स/कॉन्ट्रैक्ट कर्मचारियों (जैसे Medical Record Assistant, Registration Clerk, Store Keeper, Computer Operator आदि) ने दावा किया कि वे चयन प्रक्रिया के बाद T&M Services Consulting Pvt. Ltd. तथा NIELIT के माध्यम से UPHSSP (Uttar Pradesh Health System Strengthening Project) के लिए लगे थे और बाद में भी उनसे काम लिया जाता रहा।

याचियों का कथन था कि:

  • UPHSSP का कॉन्ट्रैक्ट समाप्त होने के बाद भी CMS (Chief Medical Superintendent) ने उन्हें काम जारी रखने को कहा।
  • Patient Welfare Committee की 04.03.2020 की बैठक में Ayushman Bharat के मद से भुगतान का प्रस्ताव/अनुमोदन जैसी बातें सामने आईं।
  • उन्हें मार्च 2020 तक भुगतान मिला, लेकिन अप्रैल 2020 से आगे का भुगतान/मानदेय लंबित हो गया।

याचिका में क्या राहत मांगी गई?

याचियों ने U.P. State Public Services Tribunal Act, 1976 की Section 4 के अंतर्गत Claim Petition दाखिल कर मुख्यतः यह राहत मांगी:

  1. 28.02.2023 तथा 06.04.2023 के आदेश निरस्त हों,
  2. 01.04.2020 से 15.04.2023 तक का वेतन/मानदेय दिलाया जाए,
  3. उन्हें जिन पदों पर काम लिया जा रहा था, वहां काम करने दिया जाए और नियमित भुगतान हो।

विभाग/प्रशासन की तरफ से क्या कहा गया?

प्रतिवादियों (राज्य सरकार/स्वास्थ्य विभाग) की ओर से कहा गया कि:

  • याची सरकारी “public servant” नहीं, बल्कि short-term/outsourcing basis पर लगे थे।
  • इसलिए यह दावा ट्रिब्यूनल के अधिकार-क्षेत्र (jurisdiction) में नहीं आता और याचिका Maintainable नहीं है।

ट्रिब्यूनल ने किन आधारों पर याचिका खारिज की?

ट्रिब्यूनल ने मुख्य तौर पर Maintainability/Jurisdiction के मुद्दे पर निर्णय दिया और कहा:

  1. Section 4 का दायरा “public servant” तक
    ट्रिब्यूनल ने स्पष्ट किया कि Claim Petition का मंच वही व्यक्ति उपयोग कर सकता है जो “is or has been a public servant” हो और सेवा-विषयक आदेश से आहत हो।
  2. याचियों के पास “public servant” होने का प्रमाण नहीं
    रिकॉर्ड के आधार पर ट्रिब्यूनल ने माना कि याची कॉन्ट्रैक्ट/आउटसोर्स थे और उन्होंने ऐसा कोई ठोस दस्तावेज नहीं दिखाया जिससे वे Act के अर्थ में public servant साबित हों।
  3. भुगतान-विवाद का उचित मंच अलग
    ट्रिब्यूनल के अनुसार कॉन्ट्रैक्ट कर्मचारियों के भुगतान/मानदेय के विवाद का निस्तारण इस ट्रिब्यूनल के बजाय Contract Act या अन्य उपयुक्त कानून/फोरम के माध्यम से कराया जा सकता है।

निष्कर्ष: ट्रिब्यूनल ने “merits” में जाए बिना, तकनीकी आधार पर Claim Petition को “not maintainable” मानते हुए खारिज कर दिया; कोई लागत (costs) नहीं लगाई गई।

इस फैसले का व्यावहारिक महत्व

यह आदेश एक साफ संदेश देता है कि—

  • यदि कर्मचारी आउटसोर्स/कॉन्ट्रैक्ट है और उसे “public servant” की श्रेणी में नहीं लाया जा सकता, तो U.P. State Public Services Tribunal में Section 4 के तहत क्लेम आमतौर पर टिकेगा नहीं
  • ऐसे मामलों में उचित वैकल्पिक मंच (जैसे ठेका/सेवा अनुबंध के आधार पर civil remedy, या तथ्य/स्थिति के अनुसार अन्य सक्षम फोरम) तलाशना अधिक प्रासंगिक रहता है।

Judgement/Order