केंद्रीय सूचना आयोग (CIC), नई दिल्ली ने एक अहम निर्णय में कहा है कि वकील अपने मुवक्किल के मामलों में जानकारी पाने के लिए “प्रतिनिधि” के तौर पर RTI का इस्तेमाल नहीं कर सकते। आयोग के अनुसार RTI कानून का उद्देश्य पारदर्शिता है, न कि किसी निजी विवाद/मुकदमे के लिए सबूत जुटाने का वैकल्पिक तरीका।

CIC का मुख्य आदेश

  • Case/Title: Paramjeet Yadav v. Department of School Education & Literacy (Respondent: CPIO/Principal, PM Shree Jawahar Navodaya Vidyalaya, Odhan, Sirsa, Haryana)

  • File No.: CIC/CIC/DSELI/A/2024/138680

  • Date of Hearing/Decision: 12.01.2026  

  • Information Commissioner: Sudha Rani Relangi

  • Key holding: Appellant (advocate) ने अपने भाई/“client per se” के behalf पर info माँगी—CIC ने कहा यह Madras HC (Madurai Bench) के view के अनुसार permissible नहीं है।

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Madras High Court (Madurai Bench) का cited judgment (जिसे CIC ने rely किया)

  • Case/Title: N. Saravanan v. Chief Information Commissioner, Tamil Nadu SIC

  • Writ Petition No.: W.P.(MD) No. 4336 of 2017

  • Date (as quoted): 15.03.2017

  • इसी judgment के extract को CIC ने अपने order में reproduce किया है (advocate/agent के तौर पर client के behalf पर RTI misuse वाली reasoning)।

फैसले का सार

  • यदि RTI आवेदन वकील द्वारा और मुवक्किल के विवाद से जुड़ी जानकारी के लिए किया जाता है, तो इसे RTI के उद्देश्य से भटका हुआ/अनुचित उपयोग माना जा सकता है।

  • ऐसे मामलों में आयोग ने यह भी स्पष्ट किया कि “संबंधित व्यक्ति” स्वयं RTI लगाए, न कि वकील अपने नाम से।

क्या करें?

  • RTI मुवक्किल के नाम से दाखिल करें (वकील ड्राफ्ट/मदद कर सकते हैं)।

  • RTI में केवल उपलब्ध रिकॉर्ड/दस्तावेज माँगें, “क्यों/कैसे” जैसे सवाल नहीं।

  • मुकदमे के सबूत हेतु कोर्ट की प्रक्रिया (रिकॉर्ड/समन/डिस्कवरी) अपनाना बेहतर है।