WRIT – A No. – 1391 of 2026 at Allahabad : Ram Narayan Yadav Vs. State Of U.P. And 2 Others
Date of Judgment/Order 
– 26/2/2026
Court Number – 34
Judgment Type – Interlocutory Non AFR
Coram – Hon’ble Vikram D. Chauhan,J.
Petitioner’s Counsels – Pranesh Kumar Mishra
Respondent’s Counsel – C.S.C. and Lal Mani Singh

1) केस का बैकग्राउंड: निलंबन किस आधार पर?

याचिकाकर्ता Junior Engineer हैं। विभाग का कहना था कि वे One Time Settlement Scheme (OTS) के अंतर्गत पंजीकरण/राजस्व वसूली के “टारगेट” को अपेक्षित स्तर तक पूरा नहीं कर पाए, इसलिए उन्हें निलंबित किया गया और साथ में कुछ सामान्य आरोप लगाए गए।

प्रतिवादी पक्ष ने यह भी कहा कि UPPCL Employees (Discipline & Appeal) Regulations, 2020 के तहत (Rule 4(3)(Kha)) याचिकाकर्ता निलंबन आदेश के विरुद्ध representation दे सकते हैं।

2) याचिकाकर्ता की मुख्य दलील: “टारगेट पूरा न होना” = “Major punishment” का आधार नहीं

याचिकाकर्ता के वकील ने इस कोर्ट के पुराने निर्णय Brijesh Kumar v. Collector/District Magistrate Mainpuri (Civil Misc. Writ Petition No. 25404 of 2001, decided on 13.07.2001) पर भरोसा करते हुए तर्क दिया कि—

  • केवल target achieve न होना, अपने आप में major punishment (कठोर/मुख्य दंड) का आधार नहीं बन सकता, और
  • बाकी आरोप vague/अस्पष्ट हैं (यानी किस तरह, कब, कैसे चूक हुई—यह स्पष्ट नहीं है)।

3) कोर्ट ने क्या देखा? (Prima facie observations)

हाईकोर्ट ने रिकॉर्ड देखकर प्रथम दृष्टया यह नोट किया कि—

  • ऐसा प्रतीत होता है कि याचिकाकर्ता को मुख्यतः टारगेट न पूरा कर पाने के कारण ही निलंबित किया गया है।
  • प्रतिवादी पक्ष, इस चरण पर, याचिकाकर्ता के खिलाफ कोई ठोस misconduct (कदाचार) स्पष्ट रूप से demonstrate नहीं कर पाया।
  • चार्जशीट में एक आरोप target से जुड़ा है और दूसरा negligence (लापरवाही) का—लेकिन लापरवाही वाले आरोप में “particulars/details” नहीं हैं; इसलिए वह अस्पष्ट (vague) है और मामला न्यायिक जांच/स्क्रूटनी मांगता है।

यहाँ एक बहुत महत्वपूर्ण “कानूनी-व्यावहारिक” nuance भी है जिसे कोर्ट ने संकेत रूप में रखा:
सिर्फ target न होना—कर्मचारी के विरुद्ध proceeding शुरू करने का कारण तो बन सकता है, लेकिन निलंबन जैसी गंभीर कार्रवाई/नतीजों के लिए आरोपों में स्पष्ट, ठोस और विवरणयुक्त आधार अपेक्षित है—जो इस केस में prima facie कमजोर दिखा।

4) चार्जशीट में क्या था? (Chargesheet dated 06.01.2025)

आदेश में उद्धृत चार्जशीट का सार यह है कि “बिजली बिल राहत योजना” के अंतर्गत अपेक्षित सुधार/प्रगति नहीं लाई गई; कार्यालय के प्रदर्शन पर असर पड़ा; और विभागीय उत्तरदायित्वों के निर्वहन में “लापरवाही/शिथिलता” का आरोप लगाया गया।
पर समस्या यही रही कि “लापरवाही कैसे हुई”—उसका ठोस विवरण चार्जशीट में स्पष्ट नहीं था।

5) अंतरिम राहत: निलंबन आदेश व विभागीय कार्यवाही पर रोक

हाईकोर्ट ने—

  • प्रतिवादी पक्ष को counter affidavit दाखिल करने का अवसर दिया,
  • केस को 29.04.2026 को सूचीबद्ध किया, और
  • अगले आदेश तक:
    1. 29.12.2025 का निलंबन आदेश, तथा
    2. याचिकाकर्ता के विरुद्ध चल रही disciplinary proceedings,
      दोनों के effect & operation पर stay लगा दिया।